कानपुर: शादी का सपना दिखाकर लोगों से साइबर ठगी करने वाले एक फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर का कमिश्नरेट पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। कल्याणपुर थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और पश्चिमी जोन की सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में दो युवतियों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से 104 सक्रिय सिम कार्ड, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, मॉडेम, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, बैंक खातों और संभावित पीड़ितों की पड़ताल में जुटी है।
‘ऑनलाइन मैच प्वाइंट’ के नाम पर चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस के मुताबिक, कल्याणपुर क्षेत्र के कैलाश विहार स्थित एक फ्लैट में ‘ऑनलाइन मैच प्वाइंट’ के नाम से फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। यहां से सोशल मीडिया, फेसबुक और विभिन्न मैट्रिमोनियल वेबसाइटों के जरिए विवाह के इच्छुक युवक-युवतियों का डेटा जुटाया जाता था। इसके बाद टेली-कॉलर फोन और व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क कर शादी कराने का भरोसा दिलाते थे।
AI तस्वीरों से बिछाते थे जाल, फिर ऐंठते थे हजारों रुपये
जांच में सामने आया है कि आरोपी इंटरनेट से महिलाओं की आकर्षक तस्वीरें डाउनलोड कर या AI जनरेटेड फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल तैयार करते थे। महिला टेली-कॉलर अलग-अलग नाम और पहचान बताकर लगातार बातचीत करती थीं, जिससे पीड़ितों को रिश्ता तय होने का भरोसा हो जाता था।
विश्वास कायम होने के बाद रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल एक्टिवेशन, दस्तावेज सत्यापन, टॉकिंग चार्ज, मीटिंग फिक्स कराने और सदस्यता शुल्क के नाम पर 4 हजार से 10 हजार रुपये तक अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराए जाते थे। रकम मिलते ही आरोपी संपर्क खत्म कर देते थे या नया बहाना बनाकर दोबारा पैसे मांगते रहते थे।
छापेमारी में मिला साइबर ठगी का पूरा सेटअप
पुलिस ने छापेमारी के दौरान विक्रम खूंटे, अनुराधा द्विवेदी और प्रियंका को गिरफ्तार किया। मौके से 104 इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड, दो नए सिम, 16 मोबाइल फोन, नौ कंप्यूटर, दो लैपटॉप, चार सीपीयू, नौ मॉडेम, की-बोर्ड, प्रिंटर, फिंगर स्कैनर, हार्ड डिस्क, वाई-फाई डिवाइस, इंटरनेट उपकरण, बैंक खातों से जुड़े रजिस्टर और 4 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
बरामद सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों को कब्जे में लेकर उनकी फोरेंसिक और डिजिटल जांच कराई जा रही है।
40 साल से अधिक उम्र के लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस के अनुसार, गिरोह मुख्य रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जो विवाह की तलाश में रहते थे। पीड़ित जिस क्षेत्र का होता था, उसी इलाके की बताकर महिला की तस्वीर भेजी जाती थी, ताकि भरोसा जल्दी कायम हो सके। लोक-लाज और कम रकम की वजह से अधिकांश लोग शिकायत भी नहीं करते थे।
कॉल सेंटर में काम करने वाली टेली-कॉलर को मासिक वेतन पर रखा गया था और प्रत्येक को निश्चित लक्ष्य दिया जाता था। लक्ष्य पूरा होने के बाद संबंधित मोबाइल नंबर और डेटा हटा दिया जाता था।
बैंक खातों और पूरे नेटवर्क की जांच तेज
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि तीनों आरोपियों की मुलाकात करीब एक वर्ष पहले सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। इसके बाद उन्होंने संगठित तरीके से कॉल सेंटर शुरू कर साइबर ठगी का नेटवर्क खड़ा किया। ठगी की रकम मुख्य रूप से अनुराधा के बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। पुलिस अब इन खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया में जुटी है।
जांच एजेंसियां कॉल डिटेल, डिजिटल ट्रांजैक्शन, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे गिरोह
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले जून महीने में भी बर्रा और यशोदा नगर क्षेत्र में संचालित फर्जी कॉल सेंटरों पर कार्रवाई की गई थी। उन मामलों की जांच भी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि शहर में सक्रिय ऐसे अन्य फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटरों की जानकारी भी मिली है, जिन पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।