अयोध्या राम मंदिर में सामने आया चढ़ावा चोरी का मामला महज एक वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि आस्था के सबसे बड़े केंद्र की आंतरिक सुरक्षा में हुई एक सुनियोजित और गहरी सेंध है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस महाघोटाले के तार दो मुख्य किरदारों—रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव से जुड़ते जा रहे हैं।
कथित तौर पर इस पूरे सिंडिकेट को चंपत राय की ‘क्लीन चिट’ और उनके इस्तीफे की पृष्ठभूमि में एक बड़ी प्रशासनिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है।
1. ड्राइवर से ‘मास्टरमाइंड’ बनने की इनसाइड स्टोरी: टिन्नू यादव का जाल
इस पूरे घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का उदय है। सूत्रों के मुताबिक, टिन्नू ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बेहद सामान्य तरीके से कदम रखा था:
- रसूख का सफर: टिन्नू यादव ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के पास बतौर ड्राइवर आया था। धीरे-धीरे उसने ट्रस्ट के भीतर अपनी पैठ बनाई और अपनी निजी गाड़ी को ट्रस्ट में किराए पर लगवा दिया।
- बिना लिखित आदेश के ‘चाबियों का पहरा’: सबसे गंभीर प्रशासनिक चूक यह रही कि टिन्नू को बिना किसी लिखित या औपचारिक आदेश के मंदिर के विभिन्न दान पात्रों (हुंडियों) की चाबियां सौंप दी गईं।
- नेपोटिज़्म और सिंडिकेट: टिन्नू ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को नोटों की गिनती (गणना ड्यूटी) में शामिल करवाया, जिसने चोरी को अंजाम देने में मदद की।
- प्रॉपर्टी डीलिंग और वित्तीय नेटवर्क: पुलिस को टिन्नू के पास से हालांकि सिर्फ ₹1 लाख नकद मिले हैं, लेकिन जांच का दायरा उसके रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी डीलरों के साथ कनेक्शन तक फैल चुका है। एजेंसियों को अंदेशा है कि चोरी की रकम को बेनामी संपत्तियों में खपाया गया है।
2. काउंटिंग रूम के ‘लापरवाह’ गार्डियन: सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका
अगर टिन्नू यादव इस चोरी का सूत्रधार था, तो सुभाष श्रीवास्तव की लापरवाही ने इस अपराध के लिए रास्ता साफ किया। सुभाष श्रीवास्तव काउंटिंग रूम (गणना कक्ष) के प्रभारी थे, जहां यह पूरा गबन हुआ।
जांच समिति का निष्कर्ष: सुभाष श्रीवास्तव सुरक्षा प्रोटोकॉल को कड़ाई से लागू करने में पूरी तरह विफल रहे। कर्मचारियों की नियमित तलाशी न होना और सुरक्षा व्यवस्था में ढील देना सीधे तौर पर उनके खिलाफ आपराधिक लापरवाही और साजिश को बढ़ावा देने का मामला बनाता है।
3. सीसीटीवी और ऑडिट रिपोर्ट: सामने आईं 7 गंभीर प्रशासनिक खामियां
जांच के दौरान मंदिर के भीतर की सुरक्षा और कार्यप्रणाली की जो परतें खुली हैं, वे हैरान करने वाली हैं:
| क्र.सं. | सुरक्षा में चूक / खामी | विवरण |
| 01 | नोट छिपाने की घटनाएं | सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारियों द्वारा नोट छिपाने के करीब 70 मामले साफ दिखे। |
| 02 | कमजोर तलाशी व्यवस्था | प्रवेश और निकास द्वारों पर कर्मियों की कोई प्रभावी चेकिंग नहीं होती थी। |
| 03 | नियमों का सरलीकरण | ट्रस्ट के अधिकारियों ने तलाशी के नियमों को ढीला कर दिया और फिर उनकी निगरानी भी नहीं की। |
| 04 | ड्रेस कोड का उल्लंघन | बैंक अधिकारियों ने काउंटिंग ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए तय ड्रेस कोड का पालन नहीं कराया। |
| 05 | डेटा सुरक्षा की अनदेखी | ऑडिट में सीसीटीवी फुटेज को 180 दिन तक सुरक्षित रखने की सिफारिश थी, लेकिन बैकअप केवल 45 दिन का रखा जा रहा था। |
4. चंपत राय को ‘क्लीन चिट’ और गरिमामयी विदाई
इस पूरे विवाद के बीच, ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है। सोमवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया, लेकिन उन्हें इस पूरे मामले से पूरी तरह दोषमुक्त रखा गया है।
- ट्रस्ट का बयान: महंत धीरेंद्र दास के अनुसार, चंपत राय की इस मामले में कोई गलती नहीं पाई गई और उन्हें ‘महापुरुष’ बताया गया है। टिन्नू यादव ने उनके भरोसे का फायदा उठाकर उनके साथ विश्वासघात किया।
- इस्तीफे का कारण: ट्रस्टियों का मानना था कि चंपत राय को पद पर बने रहना चाहिए क्योंकि उन पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है, लेकिन कानूनी सलाह और संस्थान की शुचिता को देखते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया।
- सोने-चांदी का हिसाब: ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि मंदिर को दान में मिला एक-एक ग्राम सोना और चांदी पूरी तरह सुरक्षित है और उसका पूरा लेखा-जोखा मौजूद है।
अब पुलिस और वित्तीय जांच एजेंसियों का पूरा ध्यान टिन्नू यादव के आर्थिक साम्राज्य, उसके करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों और इस सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब करने पर है।