नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में हाल के दुष्कर्म के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने सुनवाई के दौरान पुलिस से पूछा कि सिर्फ CCTV कैमरे लगाने से अपराध कैसे रुकेगा? कोर्ट ने पुलिस से अपराध होने से पहले उसे रोकने के लिए प्रभावी निगरानी और कार्रवाई की रणनीति बताने को कहा।
CCTV फुटेज अपराध के बाद काम आएगा, पहले कैसे रोकेंगे?
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि CCTV किसी पार्क में कौन कब दाखिल हुआ, यह तो दिखा सकता है, लेकिन अगर उसकी लगातार निगरानी नहीं हो रही है तो अपराध को पहले से रोकने में उसकी उपयोगिता कितनी होगी।
कोर्ट ने सवाल किया कि क्या दिल्ली पुलिस के पास ऐसा कोई सिस्टम है, जिसके जरिए संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा सके। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अगर लगातार मॉनिटरिंग नहीं होगी और कोई वॉर रूम नहीं होगा, तो अपराध को रोकने में CCTV किस तरह मदद करेगा?
अपराधियों के मन में कानून का डर क्यों नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से यह भी पूछा कि अपराध करने की तैयारी कर रहे लोगों के मन में कानून का डर पैदा करने के लिए पुलिस की क्या रणनीति है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे अपराधियों को यह डर रहे कि अपराध करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
जस्टिस पारदीवाला ने समाज और पुलिस के बीच सीधे संवाद की जरूरत पर भी जोर दिया। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या पुलिस को आम लोगों के साथ लगातार बातचीत नहीं करनी चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को समझा जा सके।
दुर्गा पूजा और दिवाली को लेकर भी तैयारी पूछी
सुप्रीम कोर्ट ने आगामी त्योहारों के दौरान दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुलिस से सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि दुर्गा पूजा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान भीड़ बढ़ेगी और ऐसे समय में असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखने की जरूरत होगी।
कोर्ट ने पुलिस से अपराध रोकने के लिए ठोस तैयारी करने को कहा और स्पष्ट किया कि दिल्ली में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस से कहा कि वह इस मामले में निराश न करे और ऐसी व्यवस्था तैयार करे, जिससे अपराध होने से पहले ही उसे रोकने की कोशिश की जा सके।