Trending News

महंगे किराए ने बढ़ाई मजबूरी, रूम के बदले जिस्म की डिमांड! इस देश में क्यों तेजी से बढ़ रहा ‘सेक्स फॉर रेंट’ का चलन

कनाडा में इन दिनों घर ढूंढना किसी जंग से कम नहीं रह गया है। किराए और प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और लाखों लोग एक किफायती घर के लिए भटक रहे हैं। लेकिन इसी आवास संकट के बीच एक बेहद परेशान करने वाला ट्रेंड तेजी से सामने आया है – ‘सेक्स फॉर रेंट’। यानी किराए के बदले यौन संबंध की शर्त।

टोरंटो, वैंकूवर और ब्रैंपटन जैसे बड़े शहरों में ऑनलाइन रेंटल विज्ञापनों में ऐसे ऑफर बढ़ रहे हैं, जहां मकान मालिक युवा महिलाओं, खासकर अंतरराष्ट्रीय छात्राओं को “मुफ्त” या “सस्ते” किराए का लालच देकर उनका शोषण करने की कोशिश कर रहे हैं।

बढ़ता किराया, गहराता संकट

Canada में 2024 से 2026 के बीच किराए में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासकर Toronto और Vancouver जैसे शहरों में दो बेडरूम अपार्टमेंट का किराया 2,700 से 3,100 कैनेडियन डॉलर तक पहुंच चुका है।

महामारी के बाद बढ़ी आबादी, भारी इमिग्रेशन और नए घरों की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए। नतीजा ये है कि कई युवा और छात्र या तो रूममेट्स के साथ ठूंस-ठूंस कर रह रहे हैं या फिर घर ही नहीं मिल पा रहा।

क्या है ‘सेक्स फॉर रेंट’ का खेल?

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे क्रेग्सलिस्ट, फेसबुक मार्केटप्लेस और किजिजी पर ऐसे विज्ञापन देखे जा रहे हैं जिनमें लिखा होता है – “फ्री रूम फॉर अट्रैक्टिव फीमेल” या “फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स।” साफ है कि टारगेट युवा महिलाएं हैं।

जांच रिपोर्ट्स में सामने आया कि कई मकान मालिक किराए के बदले यौन संबंध की मांग कर रहे हैं। कुछ मामलों में जब महिलाओं ने मना किया, तो उन्हें घर खाली करने की धमकी दी गई।

ब्रैंपटन में एक विज्ञापन में तो साफ लिखा था कि “फ्री रेंट फॉर फीमेल रूममेट जो कुकिंग करे और बेड शेयर करे।”

कानून क्या कहता है?

कनाडा में ऐसी व्यवस्था अवैध है और यह यौन उत्पीड़न और शोषण की श्रेणी में आती है। लेकिन समस्या यह है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी कमजोर है और कई पीड़ित डर या शर्म के कारण शिकायत नहीं करते।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सहमति नहीं बल्कि आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाना है।

सोशल मीडिया पर गुस्सा

सोशल मीडिया पर लोग इसे “प्रिडेटरी” और “खतरनाक ट्रेंड” बता रहे हैं। एक्टिविस्ट सरकार से सख्त कानून और बेहतर मॉनिटरिंग की मांग कर रहे हैं।

सरकार ने आवास संकट से निपटने के लिए योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किफायती घरों की भारी कमी है।

यह मामला सिर्फ किराए का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा का है। अगर इस पर जल्द कड़ा कदम नहीं उठाया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है।

news desk

Recent Posts

अनन्या-लक्ष्य की ‘चांद मेरा दिल’ ने वीकेंड पर काटा गदर! पर क्या मंडे की अग्निपरीक्षा झेल पाएगी करण जौहर की फिल्म?

करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस में बनी अनन्या पांडे और लक्ष्य लालवानी की रोमांटिक-थ्रिलर फिल्म…

2 hours ago

शेयर बाजार में आज बुल्स का महासंग्राम! Sensex 900 से ज्तादा अंक उछला, Nifty 24,000 के करीब पहुंचा

आज भारतीय शेयर बाजार में वो नज़ारा देखने को मिला, जिसका इंतज़ार इन्वेस्टर्स पिछले कई…

2 hours ago

कोहली से “इग्नोर” के बाद ट्रैविस हेड की वाइफ को किया गया ट्रोल!  जेसिका बोलीं- “ये 2023 वर्ल्ड कप की…

IPL 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के मैच के बाद…

3 hours ago

क्या कर्नाटक में बदलने वाला है सीएम का चेहरा? सिद्धारमैया हुए दिल्ली के लिए रवाना, शिवकुमार की दावेदारी तेज!

कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर 'हाई-वोल्टेज ड्रामा' शुरू हो चुका है। कांग्रेस सरकार…

3 hours ago

रिकॉर्डतोड़ गर्मी से बिगड़ रही लोगों की सेहत, डॉक्टरों ने जारी किया अलर्ट

देशभर में लगातार बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की परेशानी नहीं रही, बल्कि यह एक…

7 hours ago