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तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला पलटा, ठहराया दोषी

नई दिल्ली/गोवा। तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) को 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच से बड़ा झटका लगा है।

हाईकोर्ट ने न केवल मई 2021 में मापुसा की सत्र अदालत द्वारा तेजपाल को बरी करने के फैसले को पूरी तरह पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया, बल्कि कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा भी सुनाई है।

यह ऐतिहासिक फैसला जस्टिस डॉक्टर नीला गोखले (Justice Dr. Neela Gokhale) और जस्टिस अमित जमसंडेकर (Justice Amit Jamsandekar) की डिवीजन बेंच ने गोवा सरकार द्वारा दाखिल अपील को मंजूर करते हुए सुनाया। फैसला सुनाए जाने के दौरान तरुण तेजपाल अदालत में व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे।

‘आरोपी का नहीं, पीड़िता का ही ट्रायल कर दिया’-हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

गोवा सरकार की ओर से पेश हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने दलील दी कि सेशंस कोर्ट का फैसला पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण था:

  1. पीड़िता के चरित्र पर ध्यान: राज्य सरकार ने कहा कि निचली अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद प्रत्यक्ष साक्ष्यों की जांच करने के बजाय पीड़िता के ‘घटना के बाद के व्यवहार’, उसकी प्रतिक्रियाओं और बैकग्राउंड का ही आकलन किया। वास्तव में कोर्ट ने तेजपाल का ट्रायल करने के बजाय पीड़िता का ही ट्रायल कर डाला।
  2. माफीनामे का ई-मेल नजरअंदाज: दलील दी गई कि सेशंस कोर्ट ने उस सबसे अहम डिजिटल सबूत को खारिज कर दिया, जिसमें घटना के तुरंत बाद तरुण तेजपाल ने पीड़िता और संस्थान की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर को माफीनामा (Apology Email) भेजा था।


क्या था 2013 का चर्चित तहलका केस?

यह पूरा मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा के एक लग्जरी होटल में आयोजित ‘THINK फेस्टिवल’ के दौरान तहलका की एक जूनियर महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर 5-स्टार होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए थे।

  • पुलिस कार्रवाई: मामला सामने आने के बाद गोवा पुलिस (सीआईडी) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की और तेजपाल को गिरफ्तार किया था।
  • 2021 में मिली थी राहत: मापुसा सेशंस कोर्ट ने मई 2021 में साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए तेजपाल को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।

हाईकोर्ट ने अब इस मामले में पीड़िता के बयानों और मुख्य सबूतों को सही मानते हुए निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया और सजा का ऐलान किया।

news desk

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