बिहार की राजनीति में आरोपों का बम फोड़ने वाले प्रशांत किशोर ने सूबे के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर एक बार फिर बड़ा आरोप लगाया है. ये आरोप उस घटना से जुड़ता है जिसने लगभग 26 साल पहले बिहार की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था. पीके ने डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी पर ऐसे आपराधिक आरोप लगाए हैं जिसने पूरे बिहार में हलचल मचा दी है. एक के बाद आरोपों के बाद अब सम्राट चौधरी बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं.
पीके ने प्रेस कांफ्रेंस में सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए, पटना के 1999 के हाई प्रोफाइल शिल्पी-जैन और गौतम सिंह रेप-मर्डर केस को एक बार फिर सियासत के केंद्र में ला दिया. इस बहुचर्चित मामले को सीधा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से जोड़ते हुए पीके ने कहा कि ‘इस मामले में कई बड़े नाम आरोपी के रूप में दर्ज थे और उनमें सम्राट चौधरी का नाम भी शामिल था’. उन्होंने सवाल उठाया कि “सीबीआई जांच के दौरान क्या सम्राट चौधरी का सैंपल लिया गया? उनकी भूमिका आज भी संदिग्ध बनी हुई है.”
पीके का यह बयान सामने आते ही बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है. क्यों 1999 में जब शिल्पी गौतम मर्डर केस हुआ था तब भी ये हत्याकांड राज्य की राजनीति का केन्द्र बन गया था.
क्या था शिल्पी-गौतम रेप-मर्डर केस ?
मिस पटना का खिताब जीत चुकीं शिल्पी जैन, पटना के वीमेंस कॉलेज की मेधावी छात्रा थीं. उनके पिता उज्जवल कुमार जैन शहर के नामचीन कपड़ा कारोबारी थे. वहीं दूसरी ओर, शिल्पी के करीबी मित्र रहे गौतम सिंह आरजेडी की युवा शाखा से जुड़े हुए थे. जिनकी राजनीति में आगे जाने की काफी महत्वाकांक्षा थी.
पर 3 जुलाई 1999 को पटना के एक सरकारी क्वार्टर के गैराज में सफेद मारुति कार से दोनों की अर्धनग्न लाशें बरामद हुईं थीं, जिसके बाद यह बिहार का सबसे चर्चित पॉलिटिकल मर्डर मिस्ट्री केस बन गया था. इस मामले के आरोपियों में साधु यादव समेत कई बड़े नाम शामिल थे. सम्राट चौधरी का नाम भी इसी सूची में दर्ज था. आशंका जताई गई थी कि शिल्पी के साथ कई लोगों ने पहले रेप किया फिर उसकी और गौतम की हत्या कर दी गई. इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है.
अब पीके ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर सिलसिलेवार गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की है.
सम्राट चौधरी पर पहले भी आरोप लगा चुके है पीके
प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया है कि सम्राट चौधरी 1995 के तारापुर सामूहिक हत्याकांड के अभियुक्त रहे हैं. उन्होंने कोर्ट से राहत पाने के लिए गलत उम्र का दस्तावेज़ पेश किया था. पीके के मुताबिक, सम्राट ने उस समय खुद को 14-15 साल का दिखाया, जबकि 2020 के चुनावी हलफनामे के हिसाब से उनकी उम्र 1995 में 26 साल बनती है.
पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशांत किशोर ने कहा – “छह लोगों की हत्या का अभियुक्त उपमुख्यमंत्री बना हुआ है, जो संविधान का अपमान है. जिसको जेल में होना चाहिए, वो सत्ता की कुर्सी पर बैठा है.”
सम्राट चौधरी की मुश्किलें !
अब पीके ने नीतीश कुमार से सम्राट चौधरी पर कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी है दी कि अगर कदम नहीं उठाया गया तो जन सुराज पार्टी राज्यपाल, प्रधानमंत्री और अदालत का दरवाज़ा खटखटाएगी. ऐसे में अब माना जा रहा है कि आने वाले समय में सम्राट चौधरी की मुश्किलें और भी बढ़ने वाली हैं. आगामी विधानसभा चुनाव के पहले यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.