Trending News

बिहार विधानसभा चुनाव : पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान, क्या इस बार सत्ता परिवर्तन तय है?.

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है और अब दूसरे चरण की तैयारी चल रही है. पहले चरण में लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. 18 जिलों की 121 सीटों पर कुल 1314 उम्मीदवार मैदान में थे और अब उनका भविष्य ईवीएम में कैद हो गया है.

चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले चरण में 64.69% मतदान हुआ. यह 2020 के मुकाबले लगभग 8.5 फीसदी अधिक है. पिछले विधानसभा चुनाव में पहले चरण में सिर्फ 56.1% वोटिंग हुई थी. यानी इस बार बिहार के मतदाता ज्यादा सक्रिय नजर आए हैं.

चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो जब-जब बिहार में 5% से अधिक मतदान बढ़ा है, सत्ता परिवर्तन हुआ है. यही वजह है कि एनडीए खेमे में बेचैनी और विपक्ष में उत्साह दोनों ही दिखाई दे रहे हैं.

वोटिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव

2020 में पहले चरण में कुल 3.70 करोड़ वोटर थे, जिनमें से 2.06 करोड़ ने वोट डाला था. इस बार वोटरों की संख्या बढ़कर 3.75 करोड़ हो गई और मतदान प्रतिशत 64.69 रहा. वोटिंग में यह इजाफा विपक्षी दलों के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है, क्योंकि अधिक मतदान को अक्सर एंटी-इंकंबेंसी (विरोधी लहर) का संकेत माना जाता है.

बिहार में सिर्फ़ 5% वोटिंग से कैसे पलट जाती है सत्ता?

बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प पैटर्न बार-बार दिखा है वोटिंग प्रतिशत में महज़ 5% का उतार-चढ़ाव भी सरकार बदलने की वजह बन जाता है.

1967 के विधानसभा चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ। 1962 में जहाँ 44.5% मतदान हुआ था, वहीं 1967 में वोटिंग बढ़कर 51.5% तक पहुँच गई , यानी करीब 7% की बढ़ोतरी। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही सरकार चली गई और पहली बार गैर-कांग्रेसी दलों ने मिलकर सत्ता संभाली.

ऐसा ही कुछ 1980 में भी हुआ. 1977 के चुनाव में 50.5% वोट पड़े थे, जबकि 1980 में यह बढ़कर 57.3% तक पहुँच गया. लगभग 6.8% की छलांग. इस बार जनता पार्टी की विदाई हुई और कांग्रेस सत्ता में लौट आई.

1990 में भी वही कहानी दोहराई गई. 1985 में 56.3% वोटिंग थी, जो 1990 में बढ़कर 62% हो गई. 5.8% की बढ़त ने कांग्रेस की सत्ता छीन ली और जनता दल ने सरकार बना ली.

हालाँकि नवंबर 2005 में यह ट्रेंड उलट गया. उस बार 16% कम वोटिंग हुई, और इसी के साथ सत्ता भी बदली, नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनी.

अब, मौजूदा विधानसभा चुनाव के पहले चरण में करीब 8.5% ज़्यादा वोटिंग दर्ज की गई है। इतिहास को देखें तो यह आंकड़ा फिर से बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर कर सकता है.

1951 से लेकर अब तक बिहार विधानसभा चुनावों में 60% से अधिक मतदान सिर्फ तीन बार हुआ

1990: 62.04%, 1995: 61.79%, 2020: 62.57%

लेकिन इस बार पहले चरण में ही 64.69% वोटिंग के साथ सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. अगर दूसरे चरण में भी यही रुझान रहा, तो यह बिहार चुनाव के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान होगा.

इतिहास यह संकेत दे रहा है कि जब-जब बिहार के मतदाता उत्साह से बाहर निकले हैं, सत्ता का चेहरा बदल गया है।
अब देखना यह है कि इस बार बढ़े हुए मतदान का फायदा किसे मिलता है, एनडीए को या महागठबंधन को?

news desk

Recent Posts

भारत में 21 करोड़ लोग “HyperTension” का शिकार! 6.75 करोड़ लोग हैं बेखबर? जानिए इस ‘साइलेंट किलर’ का पूरा इतिहास

जब हम हाई ब्लड प्रेशर का नाम सुनते हैं, तो आमतौर पर हमारे दिमाग में…

46 minutes ago

पाकिस्तान में OTT पर रणवीर सिंह का धमाका! ‘Dhurandhar 2’ को लेकर जबरदस्त क्रेज, Netflix ट्रेंड्स में मचाया गदर

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह एक बार फिर लाइमलाइट में हैं। इस बार गॉसिप उनकी थियेट्रिकल…

12 hours ago

NEET-UG 2026! सीबीआई ने एनटीए एक्सपर्ट मनीषा मंदारे को किया गिरफ्तार! बायोलॉजी पेपर लीक का बड़ा खुलासा

NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई फ्रॉड के मामले में CBI के हाथ एक बहुत बड़ी…

14 hours ago

कार नहीं चलता-फिरता प्राइवेट जेट! Tata Sierra EV में मिलेगी बटन दबाते ही गायब होने वाली रूफ और गज़ब के फीचर्स

इंडियन ईवी मार्केट के बेताज बादशाह, Tata Motors अपनी सबसे आइकॉनिक और लेजेंड्री SUV 'सिएरा'…

16 hours ago

IPL 2026 के बीच बजेगी शहनाई! क्या अपनी ‘लेडी लव’ संग शादी करने जा रहे हैं हार्दिक पंड्या? वायरल खबरों ने बढ़ाई फैंस की धड़कनें

भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर और मैदान पर अपने तूफानी अंदाज के लिए मशहूर हार्दिक…

17 hours ago