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अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा भूचाल! चंपत राय के ‘इस्तीफे’ की अफवाह या SIT जांच की आंच? जानिए इनसाइड स्टोरी

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर इस वक्त मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक पर भारी हलचल है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल जी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर के वायरल होते ही हड़कंप मच गया। लेकिन अभी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी।

अधिकारियों का इनकार


इस्तीफे की खबरों के बीच अयोध्या के कारसेवकपुरम में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ है। वहां के व्यवस्था प्रभारी शिवदास सिंह और सुबोध मिश्र ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए इन खबरों को यानी की इस्तीफों को पूरी तरह से अफवाह करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनके पास इस्तीफे से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी या पत्र नहीं आया है। अधिकारियों ने भले ही इस बात को खारिज कर दिया हो, लेकिन अंदरूनी सूत्रों की मानें तो पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है।

क्या है इसके पीछे का ‘इनसाइड ट्रैक’?

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम गायब होने की शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी और कुछ गिरफ्तारियां भी की गई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को एक हाई-लेवल SIT (Special Investigation Team) का गठन किया गया। इस टीम का जिम्मा लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत और आईजी किरण एस जैसे बड़े अफसरों को सौंपा गया।

SIT रिपोर्ट में खुले कई राज

SIT ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है, जिसने ट्रस्ट के पूरे मैनेजमेंट को हिलाकर रख दिया है। सूत्रों की माने तो रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मंदिर में आने वाले भारी-भरकम चढ़ावे और दान के पैसों की गिनती की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है। पैसों की निगरानी के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जांच की सुई सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि ट्रस्ट के कुछ बड़े चेहरों और अधिकारियों की तरफ भी घूम रही है।

अब आगे क्या?

इसी SIT रिपोर्ट के लीक होने और जांच की आंच बड़े चेहरों तक पहुंचने के दबाव के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों की चर्चाएं तेज हुईं। कारसेवकपुरम के अधिकारियों ने फिलहाल इस पर परदा डालने की कोशिश की है, लेकिन जिस तरह से इस केस में यूपी सरकार और SIT की पैनी नजर बनी हुई है, उसे देखकर लगता है कि अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में आने वाले दिनों में कोई बहुत बड़ा बदलाव या प्रशासनिक एक्शन देखने को मिल सकता है।

news desk

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