बेंगलुरु में योग गुरु एम. निरंजना मूर्ति पर छात्रा ने लगाया यौन शोषण का आरोप
शहर के एक प्रसिद्ध योग गुरु एम. निरंजना मूर्ति को पुलिस ने यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है.यह मामला तब सामने आया जब उनकी एक पूर्व छात्रा ने शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि गुरु ने उसका शोषण उस समय शुरू किया था जब वह नाबालिग थी.छात्रा का कहना है कि लंबे समय तक डर और शर्म की वजह से वह चुप रही, लेकिन आखिरकार उसने हिम्मत जुटाकर पुलिस से मदद मांगी.
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि साल 2017 में जब वह 17 साल की थी, तब उसे योग प्रतियोगिता के लिए थाईलैंड ले जाया गया.वहीं पर पहली बार गुरु ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया.छात्रा के मुताबिक, उस समय गुरु ने भरोसा दिलाया कि अगर वह चुप रहेगी तो उसे अच्छे परिणाम और पदक दिलवाएंगे.यही नहीं, आगे और भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भेजने का वादा किया गया.
थाईलैंड की घटना के बाद भी छात्रा के साथ लगातार शोषण होता रहा.उसने पुलिस को बताया कि बेंगलुरु के योग केंद्र में भी कई बार उसे बुलाकर शारीरिक शोषण किया गया.जब छात्रा ने विरोध किया तो उसे धमकाया गया कि उसका करियर बर्बाद कर दिया जाएगा और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका छिन जाएगा.
लंबे समय तक दबाव और डर की वजह से वो चुप रही.लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, उसने महसूस किया कि चुप रहने से आरोपी के हौसले और बढ़ते जा रहे हैं.तब जाकर उसने हिम्मत कर अपने परिवार को सब बताया और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत दर्ज होते ही बेंगलुरु पुलिस हरकत में आई.सबसे पहले पीड़िता का बयान दर्ज किया गया और फिर मेडिकल जांच कराई गई.इसके बाद आरोपी योग गुरु एम. निरंजना मूर्ति को गिरफ्तार किया गया.पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पर POCSO (बाल यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम) एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है.साथ ही भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएँ भी लगाई गई हैं, जिनमें गंभीर अपराधों की सज़ा का प्रावधान है.
योग गुरु को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज गया.पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या और भी छात्राएँ इस तरह की घटनाओं की शिकार हुई हैं.अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी और से शिकायत मिलती है तो मामले को और बड़ा किया जाएगा.इस घटना के सामने आने के बाद योग और शिक्षा से जुड़े संस्थानों में चिंता का माहौल है। कई अभिभावकों का कहना है कि जिस गुरु पर बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर इस तरह का अपराध करे तो विश्वास टूट जाता है।कुछ सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर दोष साबित होता है तो आरोपी को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए.
बाल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर इस तरह के मामलों में पीड़ित लंबे समय तक सामने नहीं आते क्योंकि उन्हें डर होता है कि समाज उन्हें दोषी ठहराएगा.लेकिन कानून अब पीड़ितों को सुरक्षा देता है और पुलिस भी सख्ती से ऐसे मामलों को देख रही है.
पुलिस का कहना है कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और जो भी सबूत सामने आएंगे, उन्हें अदालत में रखा जाएगा.वहीं, छात्रा ने उम्मीद जताई है कि न्याय मिलने के बाद और पीड़ित भी हिम्मत करेंगे और अपनी आवाज़ उठाएँगे.
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