ट्रंप की ओर से मेलोनी को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा रद्द कर दिया है। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में नई खटास पैदा हो गई है, जबकि दोनों नेताओं को अब तक करीबी सहयोगी माना जाता रहा था।
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अब मियामी में होने वाले इटली-अमेरिका बिजनेस, इन्वेस्ट और साइंस फोरम में शामिल नहीं होंगे। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ होने वाली निर्धारित बैठक भी रद्द कर दी। तजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस्तेमाल किए गए गंभीर और अपमानजनक शब्द पूरे इटली का अपमान हैं। इसी वजह से मैंने 21 और 22 जून को प्रस्तावित अपना अमेरिका दौरा रद्द करने का फैसला किया है।”
मामला उस बयान से जुड़ा है, जिसमें ट्रंप ने दावा किया कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए “मिन्नतें” की थीं।
यह बयान ट्रंप ने 19 जून 2026 को इटली के टीवी चैनल La7 को दिए एक फोन इंटरव्यू में दिया। ट्रंप ने कहा कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए काफी उत्सुक थीं और उन्होंने उनसे फोटो लेने की गुज़ारिश की। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि उन्होंने “तरस खाकर” फोटो के लिए हामी भरी।
ट्रंप के इस बयान पर मेलोनी ने उसी दिन जवाब दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप के दावे को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया। मेलोनी ने कहा, “न मैं और न ही इटली कभी किसी से भीख मांगते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सहयोगी देशों के नेताओं के बारे में इस तरह की भाषा ठीक नहीं है।
इस बयान के बाद इटली की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई। कई नेताओं ने ट्रंप की टिप्पणी को इटली और उसकी प्रधानमंत्री का अपमान बताया। मेलोनी के समर्थकों ने कहा कि किसी भी देश के शीर्ष नेता के लिए इस तरह की भाषा कूटनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। वहीं, विपक्ष ने भी इस मामले पर सरकार के साथ एकजुटता दिखाई। कई देशों ने इसे इटली का अपमान बताया।
यह विवाद इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप और मेलोनी के रिश्तों में पहले से तनाव की खबरें रही हैं। G7 सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच रिश्ते सामान्य होते दिख रहे थे, लेकिन ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर दोनों के बीच कड़वाहट खुलकर सामने आ गई है।
हालांकि, हाल के महीनों में ईरान युद्ध को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़े हैं। इस साल की शुरुआत में मेलोनी ने ईरान युद्ध का विरोध करने वाले पोप लियो चौदहवें पर ट्रंप की आलोचना को अस्वीकार्य बताया था। इसके बाद ट्रंप ने भी इटली पर ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका का पर्याप्त समर्थन नहीं करने का आरोप लगाया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान सिर्फ निजी टिप्पणी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है। ट्रंप अक्सर अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं, जबकि मेलोनी इटली में एक मजबूत राष्ट्रवादी नेता की छवि रखती हैं। ऐसे में इस तरह की बयानबाज़ी ने दोनों नेताओं के रिश्तों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है।
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