आज यानी 2 अक्टूबर 2026 को पूरा देश एक ऐसी तारीख का गवाह है, जिसने भारतीय इतिहास की तकदीर और तस्वीर दोनों को हमेशा के लिए बदल दिया। यह महज़ एक तारीख नहीं, बल्कि देश की आत्मा और स्वाभिमान का वो अध्याय है, जिसने दुनिया को सत्य, अहिंसा और अटूट देशभक्ति का पाठ पढ़ाया। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर पूरा देश इन दोनों महान विभूतियों के चरणों में नतमस्तक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के तमाम दिग्गज नेताओं ने राजघाट और विजय घाट पहुंचकर इन महापुरुषों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आइए जानते हैं इन दोनों महान शख्सियतों के जीवन, उनके संघर्ष और देश के नाम उनके अमूल्य योगदान के बारे में विस्तार से।
महात्मा गांधी: सत्य, अहिंसा और अमर बलिदान
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। महज 13 वर्ष की अल्प आयु में उनका विवाह कस्तूरबा गांधी के साथ हुआ। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने लंदन से वकालत की पढ़ाई पूरी की। गांधीजी ने अपनी अटूट जिजीविषा और सिद्धांतों के दम पर ‘सत्य’ और ‘अहिंसा’ के अस्त्र से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सफल नेतृत्व किया। उनके जीवन के प्रमुख आंदोलनों ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी:
- चंपारण सत्याग्रह (1917)
- असहयोग आंदोलन (1920)
- दांडी मार्च (1930)
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने वाले इस महानायक का अंत बेहद पीड़ादायक रहा। 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला हाउस में नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं।
लाल बहादुर शास्त्री: सादगी, ईमानदारी और ‘जय जवान, जय किसान‘
भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उन्होंने काशी विद्यापीठ से उच्च शिक्षा प्राप्त की, जहां उनकी विद्वत्ता और ज्ञान को देखते हुए उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। वे अपनी असाधारण सादगी, बेदाग ईमानदारी और राष्ट्रनिष्ठा के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते थे।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने गांधीजी के नक्शेकदम पर चलते हुए असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
- प्रधानमंत्री कार्यकाल: वर्ष 1964 में देश की कमान संभालने वाले शास्त्री जी के कार्यकाल में 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ, जिसमें उन्होंने देश का डटकर नेतृत्व किया।
- अमर नारा: देश की रक्षा और अन्नदाताओं के सम्मान में उन्होंने जय जवान, जय किसान’ का ऐतिहासिक नारा दिया।
- सम्मान और निधन: वर्ष 1966 में उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया। 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में रहस्यमयी परिस्थितियों में उनका निधन हो गया।
प्रधानमंत्री और दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2026 को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर नई दिल्ली के राजघाट पहुंचकर उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया। सोशल मीडिया पर अपने संदेश में पीएम मोदी ने बापू के सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा के आदर्शों को याद करते हुए देशवासियों से खादी उत्पाद खरीदने और स्वदेशी अपनाने की पुरजोर अपील की।
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत देश के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सत्य, अहिंसा, सादगी और राष्ट्रसेवा की मिसाल है। उनके विचार और देश के प्रति समर्पण आज भी भारत को प्रेरणा देते हैं। गांधीजी का अहिंसा का संदेश और शास्त्री जी का ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देश की विरासत का अहम हिस्सा हैं।