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1990 अयोध्या कारसेवक गोलीकांड का क्या था सच? नृपेंद्र मिश्र ने अखिलेश यादव के आरोपों पर दी सफाई

अयोध्या | 11 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश की सियासत में 1990 का अयोध्या कारसेवक गोलीकांड एक बार फिर गर्मा गया है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार करते हुए बड़ा बयान दिया है। मिश्र ने साफ किया कि गोली चलाने जैसे संवेदनशील फैसले प्रशासनिक अधिकारियों के नहीं, बल्कि 90% राजनीतिक नेतृत्व के होते हैं। अयोध्या में मंदिर निर्माण के बीच शुरू हुई इस नई बहस ने राज्य के सियासी समीकरणों को फिर से चर्चा में ला दिया है।


“90% फैसले राजनीतिक होते हैं”: नृपेंद्र मिश्र का बड़ा खुलासा

हाल ही में अखिलेश यादव ने संसद में बिना नाम लिए नृपेंद्र मिश्र पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि “जिन्होंने गोली चलवाई, वही आज राम मंदिर बना रहे हैं।” इसका जवाब देते हुए नृपेंद्र मिश्र ने प्रशासनिक गलियारों की हकीकत बयां की।

नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि इतने बड़े फैसले किसी एक प्रिंसिपल सेक्रेटरी (प्रधान सचिव) के स्तर पर नहीं लिए जाते। इसमें मुख्यमंत्री, होम सेक्रेटरी, चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी की सामूहिक राय और राजनीतिक निर्देश शामिल होते हैं। प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ सरकार के आदेशों को लागू करने का माध्यम होते हैं।


वो खौफनाक तारीख और अयोध्या का इतिहास

30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में जो हुआ, उसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी थी। हजारों की संख्या में कारसेवक वीएचपी के आह्वान पर अयोध्या पहुंचे थे।

तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए थे। पुलिस की गोलीबारी में कई कारसेवकों की जान गई थी, जिसे लेकर आज भी सपा और भाजपा आमने-सामने रहती हैं।

दिलचस्प बात यह है कि उस वक्त नृपेंद्र मिश्र मुलायम सिंह यादव के प्रधान सचिव थे और आज वही पीएम मोदी के भरोसेमंद रहते हुए भव्य राम मंदिर के निर्माण की कमान संभाल रहे हैं।


अखिलेश बनाम बीजेपी: 2026 में क्यों उठा यह मुद्दा?

फरवरी 2026 में संसद में हुई बहस के बाद यह मुद्दा फिर से हेडलाइंस में है। जहां बीजेपी इसे सपा की ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का हिस्सा बता रही है, वहीं सपा इसे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित सवाल कह रही है। नृपेंद्र मिश्र का यह स्पष्टीकरण उन सभी कयासों पर विराम लगाने की कोशिश है जो उनकी वर्तमान भूमिका को उनके अतीत से जोड़कर देख रहे थे।


यह बयान क्यों मायने रखता है? (Why this matters)

पहली बार किसी शीर्ष अधिकारी ने इतने बड़े विवाद पर खुलकर कमान (Command) और नियंत्रण (Control) के ढांचे को जनता के सामने रखा है। मंदिर निर्माण अपने अंतिम चरणों में है और नृपेंद्र मिश्र इसके मुख्य वास्तुकार की तरह काम कर रहे हैं।

 उनके बयान से मंदिर ट्रस्ट की छवि पर पड़ने वाले राजनीतिक असर को कम करने में मदद मिलेगी।2026 के चुनावी परिदृश्य में 1990 की यादें दिलाकर दोनों दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे हैं।

news desk

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