गुवाहाटी। असम में मानसूनी बारिश और उफनती नदियों के तांडव के बीच राहत की एक धीमी किरण नजर आई है। पिछले 24 घंटों में कुछ इलाकों से पानी का स्तर धीरे-धीरे घटने से स्थिति में मामूली सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, राज्य के 5 प्रमुख जिलों में खतरा अभी टला नहीं है और 5.24 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डूबने की दो नई घटनाओं के साथ इस मानसून सत्र में राज्य में बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 68 हो गई है।
ऊपरी असम और पड़ोसी राज्य नागालैंड के जलग्रहण (Catchment) क्षेत्रों में हुई भीषण मूसलाधार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां अचानक उफान पर आ गईं। ASDMA के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे बदतर हालात निम्नलिखित जिलों में हैं:
बाढ़ के विकराल रूप को देखते हुए प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है:
बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई और मैदानी दौरा करने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्थिति को गंभीर बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागालैंड सीमा से सटे ऊपरी क्षेत्रों में हुई अप्रत्याशित बारिश के कारण नदियां अचानक खतरे के निशान से ऊपर चली गईं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री से बात कर हालात का जायजा लिया है और केंद्र सरकार की ओर से राहत व पुनर्वास के लिए हरसंभव वित्तीय और लॉजिस्टिक्स मदद का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि जब तक नदियां सामान्य जलस्तर पर नहीं लौटतीं, रेड अलर्ट और रेस्क्यू मोर्चेबंदी जारी रहेगी।
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