pankaj chaudhary - 1
लखनऊ: नीट पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने अब राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह सवाल तेज हो गया है कि क्या युवाओं की नाराजगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए चुनावी चुनौती बन सकती है। इसी बीच पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तर पर नुकसान की भरपाई की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं।
नीट पेपर लीक मामले के बाद केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने, कानून में बदलाव और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधारों के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। वहीं, धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद सरकार जवाबदेही का संदेश देने की कोशिश में भी दिख रही है।
उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नीट परीक्षा में सफल छात्रों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों के हित में लगातार फैसले ले रही है। इससे पहले उन्होंने लखनऊ में कांग्रेस के विरोध में मार्च का नेतृत्व भी किया।
पार्टी से जुड़े सूत्रों का मानना है कि यह सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश भी थी, जिन्हें पेपर लीक विवाद और 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर जनता के सवालों का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा के करीबी सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों ने युवाओं में नाराजगी बढ़ाई है। माना जा रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रदर्शन पर भी इसका असर देखने को मिला था।
आंकड़ों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें उत्तर प्रदेश में 62 से घटकर 33 रह गईं, जबकि वोट शेयर 49.98 प्रतिशत से घटकर 41.37 प्रतिशत पर पहुंच गया। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया।
भाजपा के कुछ नेताओं का मानना है कि यदि नीट पेपर लीक विवाद सामने आने के तुरंत बाद धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे देते, तो सरकार को इतने बड़े जनाक्रोश का सामना नहीं करना पड़ता।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने पूर्व नेताओं के इस्तीफों का उदाहरण देते हुए कहा कि जवाबदेही की परंपरा पहले भी रही है। उनका मानना है कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से पहले ही संवाद स्थापित कर गतिरोध खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए थी।
नीट विवाद के बाद उठाए गए कदमों को लेकर भाजपा नेतृत्व का मानना है कि सरकार के हालिया फैसलों से युवाओं के बीच बना नकारात्मक माहौल धीरे-धीरे बदलेगा। पार्टी के भीतर भी यह विश्वास जताया जा रहा है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और सख्त कार्रवाई से जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा।
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर इस मुद्दे को भुनाना चाहता है।
भाजपा एमएलसी और पूर्व एबीवीपी नेता संतोष सिंह ने दावा किया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी से जुड़े छात्र और युवा संगठनों की बड़ी संख्या मौजूद थी। उनके अनुसार प्रदर्शन में शामिल अधिकांश लोग राजनीतिक दलों से जुड़े थे।
संतोष सिंह ने 2020-21 के किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि कृषि कानूनों की वापसी के बावजूद 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दोबारा सरकार बनाई थी। उनका कहना है कि उसी तरह नीट विवाद का भी 2027 के विधानसभा चुनाव पर निर्णायक असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, चुनावी आंकड़े बताते हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 2017 के 309 से घटकर 255 रह गई थीं, जबकि समाजवादी पार्टी 47 से बढ़कर 111 सीटों तक पहुंच गई थी।
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