आइची-नागोया में खेले जा रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 के चौथे दिन 21 अक्टूबर को भारतीय एथलीटों ने मैदान पर उतरते ही ऐसा इतिहास रच दिया जिसकी गूंज पूरे एशिया में सुनाई दे रही है। मेंस शॉट पुट F53 कैटेगरी में गोल्ड मेडल हासिल करने के ठीक बाद, पैरा एथलेटिक्स के हाई जंप ट्रैक से एक और खुशखबरी आई, जहां भारत के स्टार एथलीटों ने पहले और दूसरे स्थान पर कब्जा जमाकर पोडियम पर तिरंगा लहरा दिया।
रिकॉर्ड तोड़ छलांग के साथ प्रवीण का स्वर्णिम कब्जा
पैरा एथलीट प्रवीण कुमार ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए एशियन पैरा गेम्स में हाई जंप का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। 21 अक्टूबर को गेम्स के चौथे दिन प्रवीण ने 2.05 मीटर की बेस्ट जंप लगाते हुए न सिर्फ सोने का तमगा जीता, बल्कि नया एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड भी कायम कर दिया।
इससे पहले यह रिकॉर्ड 2.02 मीटर का था, जो खुद प्रवीण ने पिछले गेम्स में बनाया था। भारत के लिए यह इस प्रतियोगिता का 11वां गोल्ड मेडल रहा।
हाई जंप में भारत का दोहरा जलवा: बंटी ने जीता सिल्वर
पुरुषों की T44 और T64 कैटेगरी के इस संयुक्त इवेंट में भारत का पूरी तरह दबदबा रहा। शरीर के निचले हिस्से की दिव्यांगता से जुड़ी इन दोनों कैटगरी के एथलीटों को एक ही इवेंट में शामिल किया गया था, जिसके चलते प्रवीण और बंटी ने एक साथ हिस्सा लिया। \
एक तरफ जहां प्रवीण ने गोल्ड पर निशाना साधा, वहीं दूसरी तरफ भारत के ही बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर अपने करियर की बेस्ट जंप दर्ज की और सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
संघर्षों से उठकर पैरालंपिक तक का सुनहरा सफर
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के रहने वाले प्रवीण कुमार का जीवन शुरुआत से ही काफी संघर्षपूर्ण रहा। एक छोटे पैर के साथ जन्मे किसान के बेटे प्रवीण ने अपनी शारीरिक दिव्यांगता को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
खेलों के प्रति अपने जुनून के दम पर उन्होंने अपनी किस्मत खुद लिखी। इससे पहले प्रवीण ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में सिल्वर मेडल, एशियन पैरा गेम्स 2022 में गोल्ड और पेरिस पैरालंपिक 2024 में भी गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया था।