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क्या डाइट और जिम के बाद भी नहीं घट रहा वजन? जानिए मेटाबॉलिज्म के 5 छिपे दुश्मन जो रोक रहे हैं फैट लॉस

क्या आप भी उस ‘हेल्दी लाइफस्टाइल’ के लूप में फंसे हैं जहाँ आप जंक फूड को ‘बाय-बाय’ कह चुके हैं, जिम में पसीना बहा रहे हैं और घर का बना खाना ही खा रहे हैं,पर फिर भी वेट मशीन का कांटा टस से मस नहीं हो रहा? तो ये खबर आपके लिए है।
अक्सर हम वेट गेन के लिए खुद को या अपनी डाइट को कोसते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स और रिपोर्ट के मुताबिक, असली खेल आपके शरीर के अंदर चल रहे ‘मेटाबॉलिज्म’ का है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब आपका वेट लॉस में चला जाता है, तो समझ लीजिए कि आपका शरीर अंदरूनी रूप से कुछ चुनौतियों से जूझ रहा है।

वजन न घटने के पीछे के 5 विलेन्स

  1. मेटाबॉलिक अडैप्टेशन: जब आप अचानक कैलोरीज़ बहुत कम कर देते हैं, तो आपका शरीर इसे ‘भुखमरी’ समझ लेता है और सर्वाइवल मोड में चला जाता है। ऊर्जा बचाने के चक्कर में मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है, जिससे शुरुआत में तो वजन गिरता है पर बाद में सब रुक जाता है।
  2. इंसुलिन रेजिस्टेंस: इंसुलिन सिर्फ ब्लड शुगर मैनेज नहीं करता, यह असल में एक स्टोरेज हार्मोन है। अगर आपकी बॉडी इंसुलिन के प्रति सेंसिटिव नहीं है, तो शरीर में इसका लेवल बढ़ जाता है, जो आपकी बॉडी को फैट बर्न करने से रोककर उसे स्टोर करने का सिग्नल देता रहता है।
  3. लेप्टिन रेजिस्टेंस: लेप्टिन वह हार्मोन है जो आपके ब्रेन को ‘Full’ होने का मैसेज भेजता है। जब इस सिस्टम में खराबी आती है, तो दिमाग को सिग्नल ही नहीं मिलता कि पेट भर चुका है, और आप अनजाने में ओवरईटिंग के शिकार हो जाते हैं।
  4. हार्मोनल इम्बैलेंस: थायराइड की कमी, PCOS और स्ट्रेस हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ का बढ़ना आपके मेटाबॉलिज्म को सुस्त बना देता है।
  5. हेल्दी फूड का ‘ओवरडोज़’ : नट्स, एवोकैडो, और पीनट बटर जैसे सुपरफूड्स सेहतमंद तो हैं, लेकिन ये कैलोरी-डेंस भी होते हैं। हम अक्सर इन्हें ‘हेल्दी’ मानकर बिना नापे खा लेते हैं, जिससे अनजाने में कैलोरी सरप्लस हो जाता है और वजन बढ़ जाता है।

एक्सपर्ट्स के बताए ‘Pro-Tips’


प्रोटीन को बनाएं प्रायोरिटी: अपनी डाइट में प्रोटीन बढ़ाएं। यह न सिर्फ आपको ज्यादा देर तक भरा हुआ महसूस कराता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी किक-स्टार्ट करता है और आपकी मसल्स को बचाता है।


स्ट्रेंथ ट्रेनिंग है जरूरी: सिर्फ कार्डियो या वॉक के भरोसे न रहें। वेट लिफ्टिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू करें। जितनी ज्यादा मसल्स होंगी, आपकी बॉडी रेस्ट करते वक्त भी उतनी ज्यादा कैलोरी बर्न करेगी।


क्वालिटी स्लीप और स्ट्रेस मैनेजमेंट: कोर्टिसोल यानि स्ट्रेस हार्मोन को कंट्रोल में रखने के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद किसी जादुई दवा से कम नहीं है। स्ट्रेस कम होगा तो फैट लॉस आसान होगा।


इंटरमिटेंट फास्टिंग का जादू: इंसुलिन लेवल को रिसेट करने के लिए टाइम-बाउंड ईटिंग काफी असरदार हो सकती है। इससे शरीर को फैट बर्न करने का समय मिलता है।

news desk

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