नई दिल्ली: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अपने विशाल रॉकेट स्टारशिप की 14वीं परीक्षण उड़ान की तैयारी कर रही है। 22 सितंबर को संभावित इस उड़ान के लिए अभी कुछ सरकारी मंजूरियां मिलना बाकी है। यह मिशन इसलिए अहम है, क्योंकि इससे स्टारशिप की अंतरिक्ष में काम करने की क्षमता, स्टारलिंक उपग्रहों के विस्तार और चांद पर इंसानों को भेजने की नासा की योजना से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
स्टारशिप को दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले अंतरिक्ष परिवहन तंत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्पेसएक्स का लक्ष्य इसके जरिए अंतरिक्ष में अधिक सामान पहुंचाना और प्रक्षेपण की लागत कम करना है। ऐसे में अगली परीक्षण उड़ान से मिलने वाले नतीजे कंपनी की आगे की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
जुलाई में हुए पिछले परीक्षण के दौरान स्टारशिप अंतरिक्ष तक पहुंचा था और उसने 20 स्टारलिंक V3 उपग्रहों को उनकी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया था। वापसी के दौरान यान का ऊपरी हिस्सा पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने के बाद हिंद महासागर में उतरा था। इस दौरान इंजीनियरों को कई अहम जानकारियां मिली थीं।
हालांकि, पिछली उड़ान में स्टारशिप पृथ्वी का पूरा चक्कर लगाने में सफल नहीं हुआ था। इसके अलावा, सुपर हेवी बूस्टर भी उतरने की प्रक्रिया के दौरान नष्ट हो गया था।
अब 14वीं परीक्षण उड़ान के लिए रॉकेट में कई बदलाव किए गए हैं। प्रस्तावित योजना के मुताबिक, यह मिशन करीब 10 घंटे का होगा। इस दौरान स्टारशिप पृथ्वी से लगभग 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहकर छह चक्कर लगाएगा और इसके बाद प्रशांत महासागर में उतरेगा।
हालांकि, यह उड़ान अंतिम सरकारी मंजूरी मिलने पर निर्भर है।
स्टारशिप दो प्रमुख हिस्सों से मिलकर बना है। इसमें सुपर हेवी बूस्टर और स्टारशिप अंतरिक्ष यान शामिल हैं। इसे पूरी तरह दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले अंतरिक्ष परिवहन तंत्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
स्पेसएक्स की योजना इस रॉकेट के जरिए ज्यादा सामान अंतरिक्ष में पहुंचाने और प्रक्षेपण को कम खर्चीला बनाने की है। इसका सीधा संबंध कंपनी के स्टारलिंक इंटरनेट कारोबार से भी है।
स्टारलिंक V3 उपग्रहों के विस्तार से नेटवर्क की गति और क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है। ऐसे में स्टारशिप की परीक्षण उड़ान केवल रॉकेट की तकनीकी क्षमताओं को परखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्पेसएक्स की उपग्रह इंटरनेट से जुड़ी योजनाओं के लिए भी अहम है।
स्टारशिप की अगली उड़ान का महत्व अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम से भी जुड़ा है। नासा चांद पर इंसानों को भेजने की योजना के तहत स्टारशिप के एक विशेष संस्करण को चंद्र लैंडर के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है।
योजना के अनुसार, 2027 में प्रस्तावित आर्टेमिस-3 मिशन में इसी लैंडर का इस्तेमाल किया जाना है।
इस मिशन के लिए स्टारशिप को यह साबित करना होगा कि वह अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह तक पहुंचाने और वहां सुरक्षित उतरने में सक्षम है। इसके साथ ही, चंद्रमा से वापसी की प्रक्रिया को लेकर भी उसकी क्षमताओं का प्रदर्शन जरूरी होगा।
यही वजह है कि स्टारशिप की परीक्षण उड़ानों से मिलने वाला तकनीकी डेटा नासा की चंद्र योजनाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एलन मस्क की अंतरिक्ष संबंधी महत्वाकांक्षाओं में मंगल ग्रह तक इंसानों को पहुंचाना प्रमुख लक्ष्य रहा है। स्टारशिप को इसी दिशा में विकसित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में लोगों और जरूरी सामान को पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष तक ले जाने की क्षमता हासिल की जा सके।
हालांकि, मंगल मिशन से पहले स्टारशिप को कई तकनीकी चुनौतियों से पार पाना होगा। इसमें अंतरिक्ष में सुरक्षित यात्रा, दोबारा इस्तेमाल की क्षमता और अलग-अलग परिस्थितियों में यान के संचालन को सफलतापूर्वक साबित करना शामिल है।
ऐसे में 14वीं परीक्षण उड़ान के नतीजे स्पेसएक्स की आगामी योजनाओं के लिए अहम होंगे। इस मिशन से यह समझने में मदद मिलेगी कि स्टारशिप की तकनीक कितनी आगे बढ़ी है और चांद तथा मंगल से जुड़ी योजनाओं के लिए अभी किन चुनौतियों पर काम करना बाकी है।
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