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देश छोड़कर भागने की आशंका? माल्या–नीरव के बाद अब ‘अंबानी’ पर सुप्रीम कोर्ट  की सख्त चेतावनी, कहा– ‘बाहर जाने से रोको’

नई दिल्ली: क्या भारत एक बार फिर किसी बड़े उद्योगपति के देश छोड़ने की आशंका से गुजर रहा है? सुप्रीम कोर्ट में हुई ताज़ा सुनवाई के बाद यही सवाल ज़ोर पकड़ रहा है। रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व प्रमोटर अनिल अंबानी को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत ने जांच एजेंसियों को ऐसी सख्त चेतावनी दी है, जिसने पूरे सिस्टम में हलचल मचा दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि यह एन्स्योर किया जाए कि अनिल अंबानी देश से बाहर न जा सकें। यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है, जब देश विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे मामलों की कड़वी यादें अब तक नहीं भूला है।

CBI-ED की देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का रुख बेहद सख्त नजर आया। कोर्ट ने CBI और ED से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि जब फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट 2020 में ही आ गई थी, तो FIR दर्ज करने में पूरे पांच साल क्यों लगा दिए गए। अदालत इस देरी से खास तौर पर नाराज़ दिखी। इतना ही नहीं, कोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए SIT यानी विशेष जांच टीम बनाने का आदेश भी दे दिया।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि अलग-अलग बैंकों से जुड़े कथित लोन फ्रॉड को एक ही केस में क्यों जोड़ा गया, जबकि हर बैंक का मामला अपने आप में अलग अपराध बनता है। कोर्ट की टिप्पणी साफ संकेत देती है कि अब इस केस में लीपापोती नहीं चलेगी।

बिजनेस साम्राज्य डगमगाया, करीबी भी जांच के घेरे में

बढ़ते दबाव के बीच अनिल अंबानी की ओर से कोर्ट में एक अंडरटेकिंग दी गई है। उनके वकीलों ने भरोसा दिलाया कि वे अदालत की अनुमति के बिना विदेश नहीं जाएंगे। हालांकि कोर्ट ने साफ कर दिया कि अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा।

कानूनी शिकंजे के साथ-साथ अनिल अंबानी का बिजनेस एम्पायर भी बुरी तरह हिल चुका है। रिलायंस पावर के शेयर अपने हाई लेवल से 65 फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं। रिलायंस इंफ्रा में हालात इतने खराब हैं कि प्राइस फ्रीज की स्थिति बन गई है। निवेशकों के करोड़ों रुपये फंस चुके हैं और कंपनी का मुनाफा करीब 40 फीसदी तक गिर गया है।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच अब सिर्फ अनिल अंबानी तक सीमित नहीं है। रिलायंस पावर के CFO अशोक पाल की गिरफ्तारी हो चुकी है। उन पर 68 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी तैयार कराने का आरोप है, जिसमें फर्जी ईमेल और नकली बैंक डोमेन का इस्तेमाल किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने उन बैंक अधिकारियों की भी जांच के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर हजारों करोड़ के लोन पास किए। अब SIT की जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि इस पूरे खेल में पर्दे के पीछे कौन-कौन शामिल था और आखिर पांच साल तक फाइलें क्यों दबाकर रखी गईं।

news desk

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