कर्नाटक में सीएम की कुर्सी से जुड़ा विवाद सुलझने के बजाए उलझता जा आ रहा है. कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने ये कह कर कुर्सी के विवाद को और गहरा दिया है कि वो ही पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे. हालांकि इससे पहले शिवकुमार खेमे के कुछ विधायक दिल्ली पहुंच कर लॉबिंग कर चुके हैं. अंदरूनी खींचतान हो या फिर ढ़ाई -ढ़ाई साल के फॉर्मूले की बात. सब मिलाकर बहुत कुछ कहानी बयान कर रही हैं जो कांग्रेस के लिए फिलहाल बेहतर तो नहीं है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवकुमार के करीबी नेताओं में शामिल गुब्बी के विधायक श्रीनिवास, श्रंगेरी के विधायक टी. डी. राजेगौड़ा, कुनिगल के विधायक एच. डी. रंगनाथ, अनेकल के विधायक बी. शिवन्ना, कुडाची के विधायक महेंद्र कलप्पा तम्मण्णावर और एमएलसी सी. रवि खड़गे से मिले और लगभग 10 मिनट तक ये बैठक चली.
इन सभी नेताओं ने पावर-शेयरिंग समझौते के चलते अपनी बात रखी और कांग्रेस अध्यक्ष से शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का अनुरोध किया। साथ ही विधानसभा चुनाव जीतने पर कांग्रेस की जो डील हुई थी शिवकुमार और सिद्धारमैया के रोल को लेकर, बतौर चीफ मिनिस्टर, उसे अब साकार करने की भी बात कही गई।
आपको बता दें की कर्नाटक में मई 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे और नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आये थे. चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस के सामने एक बड़ा सवाल था की मुख्यमंत्री किसको बनाये जाए. क्योंकि शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों ही दो बेहद मज़बूत, लोकप्रिय और कद्दावर चेहरे थे. सीएम पद के लिए इन्ही दोनों में से किसी एक के नाम पर मुहर लगनी थी. लेकिन यही पर विवाद खड़ा हुआ, पार्टी के बीच हलचल तेज़ हुई क्योंकि कुछ नेता की पसंद सिद्धारमैया थे तो कुछ नेता शिवकुमार को सीएम के रूप में देखना चाहते थे. इससे पहले, कांग्रेस की ही सरकार में साल 2013-2018 तक सिद्धारमैया फुल टर्म के लिए कर्नाटक की कमान संभाल चुके थे.
काफी माथापच्ची के बाद 2023 में सिद्धारमैया के ही नाम पर मुहर लगी और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम का पद मिला. लेकिन कुछ बदलाव के साथ. सूत्रों की माने तो ढाई ढाई साल के फामूले की बात भी कही गई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस ने ढ़ाई साल बाद ये ज़िम्मेदारी शिवकुमार को सौंपने की बात कही थी, ताकि मतभेद को खत्म किया जा सके और पार्टी को आने वाले वक़्त में किसी भी तरह का कोई खतरा न हो.
शिवकुमार गुट के मुताबिक अब, यानी नवंबर 2025 में ढ़ाई साल पूरे हो चुके हैं और वक़्त आ चूका है पावर-शिफ्ट का. ऐसे में विधायकों का कहना है की शिवकुमार ने पार्टी को सत्ता में लाने के लिए कड़ी मेहनत की है. इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री पद देकर सम्मानित किया जाना चाहिए. जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विधयकों को आश्वासन दिया की राहुल गांधी इस बात पर जल्द फैसला करेंगे. ये भी खबरें सामने आ रही हैं की खड़गे ने नेताओं को दोबारा दिल्ली आने से मना किया है ताकि ये मुद्दा ज़्यादा गहराए ना.
फिलहाल ये अंदरूनी खींचतान किस राह जाएगा, क्या फैसला लेंगे राहुल गांधी, क्या डीके शिवकुमार के प्रशंसक उन्हें सीएम बना पाएंगे, और किस तरह कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस उलझन को सुलझा पायेगा, ये फिलहाल देखने वाली बात होगी.