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होर्मुज पर अटका अमेरिका-ईरान का सबसे बड़ा दांव! क्या फिर भड़क सकता है युद्ध, आगे क्या होगा?

vineet verma
Last updated: July 11, 2026 9:15 am
vineet verma
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वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर केंद्रित हो गया है। अमेरिका ने ईरान से सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करने की मांग की है कि यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित है और यहां से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला नहीं किया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दुनिया का भरोसा बहाल करना है।

Contents
अमेरिका ने क्यों उठाई सार्वजनिक घोषणा की मांग?युद्धविराम पर ट्रंप का क्या रुख है?ईरान में सत्ता संघर्ष क्यों बना बड़ी चुनौती?दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है होर्मुज जलडमरूमध्य?ईरान ने अमेरिका की मांग पर क्या जवाब दिया?युद्धविराम के बावजूद क्यों जारी हैं हमले?ईरान ने किन देशों को बनाया निशाना?कूटनीतिक मोर्चे पर भी बढ़ी हलचलइजरायल ने क्या दी चेतावनी?ईरान की नई चेतावनी से बढ़ी चिंताओमान की वार्ता पर टिकी आगे की तस्वीर

अमेरिका ने क्यों उठाई सार्वजनिक घोषणा की मांग?

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के दिनों में हुए हमलों के पीछे ईरान के कट्टरपंथी गुटों की भूमिका मानी जा रही है, जो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष के कारण किसी भी समझौते को लंबे समय तक लागू रखना चुनौतीपूर्ण बन गया है।

युद्धविराम पर ट्रंप का क्या रुख है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए कहा कि वह अंतरिम युद्धविराम समझौते को अब समाप्त मानते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका स्थायी समाधान के लिए ईरान के साथ बातचीत जारी रखेगा। अधिकारियों के अनुसार, वार्ताकारों को सीमित समय दिया गया है और यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो राष्ट्रपति के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

ईरान में सत्ता संघर्ष क्यों बना बड़ी चुनौती?

अमेरिका का दावा है कि युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल के हमलों में लंबे समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद वहां सत्ता को लेकर खींचतान तेज हो गई है। अलग-अलग गुटों के अलग रुख के चलते हालात लगातार बदल रहे हैं और किसी भी समझौते को लागू करना कठिन होता जा रहा है।

दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया में होने वाले कुल तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता था। युद्ध के दौरान इस मार्ग पर ईरान के नियंत्रण के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया था और कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि अब कीमतें उस स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं।

ईरान ने अमेरिका की मांग पर क्या जवाब दिया?

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, बारूदी सुरंगें हटाने या वहां किसी भी तरह की गतिविधि का अधिकार केवल ईरान के पास है। उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी देश की दखलंदाजी अंतरिम समझौते का उल्लंघन होगी, समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करेगी और क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाएगी।

ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि होर्मुज पर उसका ही नियंत्रण रहेगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों को तेहरान को शुल्क देना चाहिए। हालांकि अधिकांश देश इस समुद्री मार्ग को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं।

युद्धविराम के बावजूद क्यों जारी हैं हमले?

अमेरिका द्वारा सैन्य अभियान समाप्त करने की घोषणा के बाद भी शुक्रवार को ईरान में हवाई हमले हुए, लेकिन किसी भी देश ने इनकी जिम्मेदारी नहीं ली। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि युद्धविराम की घोषणा के बाद फिलहाल कोई नई सैन्य जानकारी उपलब्ध नहीं है। वहीं, खाड़ी के अरब देशों और इजरायल ने भी हालिया हमलों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

ईरान ने किन देशों को बनाया निशाना?

गुरुवार को आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान दक्षिणी ईरान के कई इलाकों पर हमले हुए। इसके जवाब में ईरान ने पूरे पश्चिम एशिया में बड़ा मिसाइल हमला किया और बहरीन, जॉर्डन, कुवैत तथा कतर को निशाना बनाया। कुवैत में एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना है, जबकि कई देशों की वायु रक्षा प्रणालियों ने मिसाइलों को रास्ते में ही रोकने का प्रयास किया। ईरान ने इन हमलों के लिए सीधे किसी देश को जिम्मेदार नहीं ठहराया, हालांकि एक सांसद ने संयुक्त अरब अमीरात पर अमेरिका की मदद करने का आरोप लगाया।

कूटनीतिक मोर्चे पर भी बढ़ी हलचल

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची शनिवार को ओमान में अपने समकक्ष से मुलाकात करेंगे। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने उम्मीद जताई है कि ओमान की मध्यस्थता से सप्ताहांत में समाधान की दिशा में प्रगति हो सकती है।

ईरानी हमले के तुरंत बाद संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कुवैत पहुंचे और वहां के अमीर से मुलाकात की। खाड़ी देशों ने कतर के विदेश मंत्री से भी बातचीत की। कतर, पाकिस्तान के साथ मिलकर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इजरायल ने क्या दी चेतावनी?

इजरायल सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार रात राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत की, जिसमें खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की गतिविधियों पर चर्चा हुई। वहीं, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इजरायल पहले से भी अधिक ताकत के साथ कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि अगर दोबारा लौटना पड़ा तो पहले से कहीं ज्यादा शक्ति के साथ जवाब दिया जाएगा।

ईरान की नई चेतावनी से बढ़ी चिंता

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य और रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर इस्माइल कौसारी ने सरकारी मीडिया से कहा कि अमेरिका का साथ देने की कीमत संयुक्त अरब अमीरात को चुकानी पड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया अमेरिकी हमलों में यूएई ने पर्दे के पीछे से भूमिका निभाई थी। इस बीच अमेरिका जहाजों को सलाह दे रहा है कि वे ईरानी जलक्षेत्र से बचते हुए ओमान के समुद्री क्षेत्र वाले दक्षिणी मार्ग का इस्तेमाल करें।

ओमान की वार्ता पर टिकी आगे की तस्वीर

युद्धविराम के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच भरोसे का संकट बना हुआ है। एक ओर अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित घोषित करे, जबकि दूसरी ओर ईरान इस क्षेत्र पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखने पर अड़ा हुआ है। लगातार हो रहे हमले, ईरान का सत्ता संघर्ष, इजरायल की सख्त चेतावनी और खाड़ी देशों की बढ़ती सक्रियता यह संकेत दे रही है कि हालात अभी सामान्य होने से दूर हैं। ऐसे में ओमान में होने वाली वार्ता इस पूरे संकट की आगे की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।

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