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‘वंदे मातरम’ का अपमान किया तो होगी 3 साल की जेल! संसद से पास हुआ नया संशोधन बिल

भारतीय संसद ने देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के कानूनी संरक्षण के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। संसद के दोनों सदनों से ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक, 2026’ पास हो गया है। 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को भारी हंगामे के बीच लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद, अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह नया नियम पूरे देश में लागू हो जाएगा।

1971 के कानून में बदलाव और सख्त सजा

यह नया बिल ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ के दायरे का विस्तार करता है। अब तक इस कानून के तहत केवल राष्ट्रध्वज “तिरंगा”, संविधान और राष्ट्रगान “जन गण मन” के अपमान पर ही कानूनी कार्रवाई का प्रावधान था। अब ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने, इसे गाए जाने के दौरान रुकावट डालने या हंगामा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

150वीं वर्षगांठ का ऐतिहासिक अवसर

यह ऐतिहासिक संशोधन बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर लाया गया है। इसके तहत राज्य विधानसभाओं और सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगीत के वादन से जुड़े निर्देशों को भी शामिल किया गया है, ताकि स्वतंत्रता संग्राम के इस प्रतीक को इसका वास्तविक दर्जा मिल सके।

सरकार की दलील

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत की राष्ट्रीय चेतना और आजादी की लड़ाई की आत्मा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने तुष्टिकरण की राजनीति के कारण राष्ट्रगीत को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका वह हकदार था। अब मोदी सरकार इसे इसका वास्तविक और ऐतिहासिक गौरव प्रदान कर रही है।

विपक्ष का पक्ष

दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया। DMK सांसद के. कनिमोझी ने इसे “हिंदुत्व का एजेंडा” बताते हुए कहा कि कानून बनाकर राष्ट्रवाद नहीं थोपा जा सकता। वहीं CPI(M) और अन्य दलों के नेताओं ने सवाल उठाया कि यह नियम संविधान द्वारा दिए गए अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19, 21 और 25) के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।

जहाँ एक तरफ सरकार इसे राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम मान रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संघवाद के ढांचे पर असर डालने वाला बता रहा है। बहरहाल, राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी मिलते ही यह संशोधित कानून पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा।

news desk

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