आंध्र प्रदेश के शहरी निकाय चुनाव में चुनावी मैदान जंग का मैदान बन चुका है। हिंसा, अपहरण और विपक्ष के प्रत्याशियों को नामांकन से रोके जाने के बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोपों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा कड़ा कदम उठाया है जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। जगन मोहन रेड्डी की पार्टी YSR कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत ने चुनाव आयोग को सीधे निर्देश दिए हैं कि वह 25 अक्टूबर तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची का प्रकाशन न करे। इस आदेश के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच चल रही तनातनी अब अपने चरम पर पहुंच गई है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
बुधवार (21 अक्टूबर) को सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा: “जिन पार्टियों और प्रत्याशियों ने नामांकन के दौरान सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपा ह।
उस पर कल शाम तक निर्णय लें। निर्णय प्रकाशित होने के बाद उन प्रत्याशियों को नामांकन के लिए 48 घंटे का समय दें। राज्य के डीजीपी यह सुनिश्चित करें कि सभी नामांकन केंद्रों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था हो।”
YSR कांग्रेस का गंभीर आरोप
YSR कांग्रेस (YSRCP) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि सत्ता के बल पर विपक्ष के प्रत्याशियों को हिंसा के जरिए नामांकन भरने से रोका जा रहा है। पार्टी का दावा है कि अगर इस वक्त चुनाव आयोग को उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी करने दी गई, तो करीब 63% प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए जाएंगे।
इससे पहले YSRCP के राज्य महासचिव एल. अप्पी रेड्डी ने राज्य चुनाव आयुक्त से गुहार लगाते हुए हिंसा में तुरंत हस्तक्षेप और पीड़ित प्रत्याशियों के लिए न्याय की मांग की थी। उन्होंने TDP नेताओं पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुप्पम में YSRCP के चेयरपर्सन पद के उम्मीदवार विजय कुमार का उनके DK पल्ली स्थित आवास से अपहरण कर लिया गया है।
सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू का पलटवार
दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और TDP प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने YSRCP के इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जहां गठबंधन सरकार राज्य के विकास के लिए दिन-रात काम कर रही है, वहीं YSRCP अपने पुराने विनाशकारी एजेंडे पर ही चल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि YSRCP ने अतीत में भी और मौजूदा चुनावों में भी हिंसा का ही सहारा लिया है। चंद्रबाबू नायडू ने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “मेरे जीवन में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन मैं अपराधियों और गुंडों से भागूंगा नहीं।”