उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाला चुनाव अब सिर्फ सीटों के गणित तक सीमित नहीं रह गया है। मतदान से पहले विधायकों की लामबंदी, पुराने राजनीतिक रिश्तों की वापसी और संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर सियासी हलचल तेज है।
इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐसा बयान दिया है, जिसने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
अखिलेश यादव ने कहा है कि राज्यसभा चुनाव का समय ‘मिलन का समय’ होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो साथी साथ आना चाहते हैं, उनके लिए पुरानी कड़वी बातें भूलने को तैयार हैं। उनका संदेश लोकतंत्र और संविधान के सवाल पर साथ आने को लेकर था।
‘जो गठबंधन पहले था, उसे आगे बढ़ाएंगे’
अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर भी कहा कि जो गठबंधन पहले से था और जिसने बीजेपी को हराया था, समाजवादी पार्टी उसी गठबंधन को आगे बढ़ाने का काम करेगी।
उनके इस बयान को उन नेताओं और विधायकों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जिनके सपा से रिश्ते रहे हैं लेकिन बाद में राजनीतिक समीकरण बदल गए।
राज्यसभा चुनाव के बीच अखिलेश का यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सपा तीसरी सीट के लिए जरूरी संख्या जुटाने की कोशिश कर रही है।
अब्बास अंसारी से करीब डेढ़ घंटे की मुलाकात
अखिलेश यादव के बयान से ठीक पहले सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी ने लखनऊ में उनसे मुलाकात की थी। दोनों के बीच करीब एक से डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई।
यह मुलाकात उस समय हुई है जब सपा तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार के लिए संख्या जुटाने में लगी है। अब्बास अंसारी सुभासपा के विधायक हैं, जबकि सुभासपा उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार में NDA की सहयोगी है।
मुलाकात के बाद अब्बास अंसारी ने मीडिया से बातचीत नहीं की। इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
RLD के दो मुस्लिम विधायकों पर भी नजर
सपा की नजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय लोक दल यानी RLD के दो मुस्लिम विधायकों पर भी बताई जा रही है।
इनमें मेरठ की सिवालखास सीट से गुलाम मोहम्मद और शामली की थानाभवन सीट से अशरफ अली खान शामिल हैं। दोनों 2022 में सपा-RLD गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा पहुंचे थे।
हालांकि दोनों विधायक इस समय RLD के साथ हैं और उनके राज्यसभा चुनाव में रुख को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए सपा के पक्ष में उनके वोट को फिलहाल संभावना के तौर पर ही देखा जा रहा है।
समझिए राज्यसभा का पूरा गणित
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच और 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख है।
मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक सपा और कांग्रेस के पास मिलकर दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।
यही वजह है कि अब सपा का फोकस उन विधायकों पर है जिनके पुराने राजनीतिक रिश्ते विपक्षी खेमे से रहे हैं या जिनके रुख को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
क्या 2027 से पहले बन रहा है नया राजनीतिक समीकरण?
राज्यसभा चुनाव भले ही कुछ दिनों का चुनाव हो, लेकिन इसके बहाने उत्तर प्रदेश में 2027 की राजनीति के संकेत तलाशे जा रहे हैं।
एक तरफ अखिलेश यादव पुराने साथियों को वापस आने का संदेश दे रहे हैं, दूसरी तरफ दूसरे दलों के कुछ विधायकों से मुलाकातों की चर्चा है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है-क्या राज्यसभा चुनाव सिर्फ एक सीट का गणित है, या फिर 2027 से पहले पुराने राजनीतिक रिश्तों को फिर से जोड़ने की शुरुआत भी बन रहा है?
इसका जवाब आने वाले दिनों में विधायकों के रुख और राज्यसभा के मतदान से साफ होगा।