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एयर इंडिया सीईओ कैंपबेल विल्सन ने दिया इस्तीफा… अब नए CEO की तलाश में टाटा ग्रुप

नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2026: एयर इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विल्सन ने इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उनका इस्तीफा पिछले हफ्ते बोर्ड की बैठक में स्वीकार कर लिया गया। विल्सन नोटिस पीरियड में रहेंगे और नए सीईओ की नियुक्ति तक कंपनी के साथ बने रहेंगे ताकि ट्रांजिशन सुचारू रहे।

यह खबर एयर इंडिया के लिए बड़े बदलाव का संकेत है, खासकर जब एयरलाइन रिकॉर्ड घाटे, ऑपरेशनल दिक्कतों और 2025 की घातक दुर्घटना के बाद सुरक्षा जांच से जूझ रही है। टाटा ग्रुप अब एयर इंडिया CEO की भूमिका के लिए वैश्विक स्तर पर अनुभवी लीडर्स की तलाश कर रहा है।

कैंपबेल विल्सन कौन हैं और उनका कार्यकाल कैसा रहा?

न्यूजीलैंड के मूल निवासी कैंपबेल विल्सन सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) की लो-कॉस्ट सब्सिडियरी Scoot के पूर्व CEO थे। उन्होंने 2022 में एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन के तुरंत बाद सीईओ पद संभाला। उनका मूल अनुबंध जुलाई 2027 तक था, लेकिन टाटा ग्रुप ने जनवरी 2026 से ही नए उम्मीदवारों से बातचीत शुरू कर दी थी।

विल्सन के नेतृत्व में एयर इंडिया ने Vihaan.AI टर्नअराउंड प्लान लॉन्च किया, जिसमें शामिल थे:

  • 470 नए एयरक्राफ्ट का बड़ा ऑर्डर
  • ब्रांड रीफ्रेश और केबिन अपग्रेड
  • विस्तारा के साथ मर्जर

इन कदमों से एयरलाइन की फ्लीट और सर्विस में सुधार हुआ, लेकिन लगातार घाटा और धीमी प्रगति टाटा ग्रुप के लिए चिंता का विषय बनी रही।

इस्तीफे की मुख्य वजहें क्या हैं?

एयर इंडिया अभी भी भारी घाटे में चल रही है। 2025 में अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट AI 171 की दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद सुरक्षा मानकों, पायलट ट्रेनिंग और नियामक जांच पर काफी दबाव बढ़ा।

टाटा ग्रुप को पिछले साल के प्रदर्शन से असंतोष था। ऑपरेशनल चुनौतियां, बढ़ती लागत और बाजार हिस्सेदारी में सीमित बढ़ोतरी ने लीडरशिप चेंज की चर्चाओं को तेज कर दिया।

टाटा ग्रुप की नई रणनीति

टाटा संस चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन अब एयर इंडिया को विश्व स्तरीय एयरलाइन बनाने के अगले चरण में तेजी लाना चाहते हैं। नए सीईओ की तलाश पूरी तरह वैश्विक है – ऐसे उम्मीदवारों पर फोकस जिनके पास बड़े पैमाने पर फुल-सर्विस एयरलाइंस चलाने का अनुभव हो।

एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस की 25% हिस्सेदारी भी इस बदलाव को और अहम बनाती है। नए लीडरशिप से उम्मीद है कि टर्नअराउंड प्लान की गति बढ़ेगी और प्रॉफिटेबिलिटी की राह आसान होगी।

यह बदलाव क्यों मायने रखता है? (Why This Matters)

  • पैसेंजर्स के लिए: बेहतर सर्विस, नई फ्लीट और समय पर उड़ानें मिलने की संभावना बढ़ेगी।
  • एयरलाइन के लिए: घाटे को कम करने और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने (30% टारगेट) में नई ऊर्जा मिल सकती है।
  • उद्योग के लिए: टाटा ग्रुप की एविएशन बिजनेस (एयर इंडिया + एयर इंडिया एक्सप्रेस) में बड़े स्तर पर लीडरशिप रीस्ट्रक्चरिंग का संकेत।

क्या कहते हैं सूत्र? एयर इंडिया ने अभी तक इस विकास पर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। नए सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और आने वाले दिनों-हफ्तों में बड़ा ऐलान होने की संभावना है।

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