नई दिल्ली: संसद में एक सप्ताह से जारी गतिरोध के बाद आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति के बाद लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा होगी। यह वही विधेयक है, जिसे लेकर पिछले कई दिनों से संसद में लगातार टकराव देखने को मिला था।
यह घटनाक्रम केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के दो दिन बाद सामने आया है। उन्होंने नीट (यूजी) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चले लंबे छात्र आंदोलन के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था।
सोमवार को सरकार और विपक्ष के बीच कई दौर की बातचीत के बाद संसद की कार्यवाही आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और सरकार के फ्लोर मैनेजरों ने विभिन्न दलों के नेताओं से लगातार संवाद किया।
हालांकि दिनभर संसद के दोनों सदनों में छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष का विरोध जारी रहा और कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि मंगलवार को एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा होगी। बहस के दौरान सांसद अपने-अपने संशोधन प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसके बाद सरकार उनका जवाब देगी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस विधेयक पर कुल 91 संशोधन प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है।
सोमवार की शुरुआत विपक्षी सांसदों के संसद परिसर में प्रदर्शन से हुई। विपक्ष ने छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर विरोध जताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के अन्य सांसद भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसद लोकसभा के वेल में पहुंच गए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग करने लगे। हंगामे के बीच दोपहर करीब 12 बजे प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 सदन में पेश किया।
दोपहर बाद कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर ओम बिरला ने सभी दलों से छात्रों के भविष्य से जुड़े इस विधेयक पर चर्चा करने की अपील की। बाद में सरकार और विपक्ष को बातचीत का अवसर देने के लिए सदन की कार्यवाही शाम तक स्थगित कर दी गई।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने स्वयं इस विधेयक पर बड़ी संख्या में संशोधन दिए हैं, फिर चर्चा से पीछे हटने का कोई कारण नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश का युवा संसद की कार्यवाही देख रहा है और ऐसे महत्वपूर्ण कानून पर बहस होनी चाहिए। शाम को कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी हंगामा जारी रहा, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग की, लेकिन नोटिस स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग करते हुए विरोध जारी रखा।
इस दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 विचारार्थ पेश किया, लेकिन लगातार हंगामे के कारण चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से सदन चलने देने की अपील की, जबकि विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा।
सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए वर्ष 2024 के कानून को और सख्त बनाने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के दोषी पाए जाने पर अधिकतम सजा 10 वर्ष तक हो सकती है। मौजूदा कानून में यह अवधि 3 से 5 वर्ष थी। अधिकतम जुर्माने की सीमा भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।
यदि अपराध किसी संगठित गिरोह या नेटवर्क द्वारा किया गया पाया जाता है, तो न्यूनतम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में यह भी प्रस्तावित है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाएगी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का अधिकार मिलेगा, ताकि आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमों का निपटारा किया जा सके।
इसके अलावा केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष कार्यबल (स्पेशल टास्क फोर्स) गठित करने का अधिकार भी मिलेगा।
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई-लेवल टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की थी।
उल्लेखनीय है कि मानसून सत्र का पहला सप्ताह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और छात्र आंदोलन को लेकर संसद के भीतर और बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों की भेंट चढ़ गया। अब विपक्ष का मुख्य फोकस केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर सदन में जवाब दिलाने पर है।
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