अमरावती: चक्रवात अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई है। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के बीच अब तक आठ लोगों की मौत की खबर है। कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई। निचले इलाकों में जलभराव के साथ फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर, चक्रवात के प्रभाव से ओडिशा के कई जिले भी भारी बारिश की चपेट में हैं। हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि वहां अब तक किसी की जान नहीं गई है। हालात से निपटने के लिए ओडिशा में 313 राहत एवं बचाव दल तैनात किए गए हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
चक्रवात अर्नब बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश और यानम के तटों से टकराया। इसके बाद कई तटीय जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य में आठ लोगों की जान गई है। इनमें पेड़ गिरने, बिजली के खंभे ढहने और खुले बिजली के तारों की चपेट में आने से हुई मौतें शामिल हैं।
पश्चिम गोदावरी जिले के भीमावरम में दो लोगों की मौत हुई। इनमें एक व्यक्ति पेड़ गिरने और दूसरे की बिजली का खंभा गिरने से जान गई। कोनसीमा जिले में मकान ढहने से एक महिला की मौत हो गई। वहीं, विशाखापत्तनम में बिजली के खंभे गिरने से दो महिलाओं की जान चली गई।
इसके अलावा, अनाकापल्ली जिले के येलमंचिली में एक महिला की मौत खुले बिजली के तार की चपेट में आने से हुई। तूफान के खतरे को देखते हुए पहले ही आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से 20 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।
चक्रवात के तट से टकराने के दौरान हवाओं की अधिकतम निरंतर रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जबकि तूफानी झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे। तेज हवाओं ने तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया।
कई स्थानों पर पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए और बिजली के खंभे टूट गए। इसके चलते आवागमन प्रभावित हुआ और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। विशाखापत्तनम के निचले इलाकों में पानी भर गया। शहर में 24 घंटे के भीतर 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई।
काकीनाडा जिले में शुरुआती आकलन के अनुसार, सैकड़ों पेड़ और करीब 100 बिजली के खंभे गिर गए। यहां उप्पाडा तटीय सड़क भी पूरी तरह बह गई। कोनसीमा और काकीनाडा के कई इलाकों में बिजली गुल होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश हुई। मलकानगिरी, कोरापुट, रायगड़ा, गजपति और गंजाम जिले सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के मुताबिक, राज्य में हवा की रफ्तार करीब 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा रही, लेकिन बारिश काफी तेज हुई। दक्षिण ओडिशा के 17 प्रखंडों में 105 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई।
कोरापुट जिले के पोटांगी प्रखंड में सबसे ज्यादा 188 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि गजपति जिले के मोहना प्रखंड में 182.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। मुख्यमंत्री ने गजपति को सबसे अधिक प्रभावित जिला बताया।
भारी बारिश से निचले इलाकों में पानी भर गया। कुछ स्थानों पर पुलों के ऊपर से दो से चार फीट तक पानी बहने की जानकारी सामने आई। कई जगह पेड़ गिरने से रास्ते भी बाधित हुए, जिन्हें अग्निशमन दलों ने पेड़ों को हटाकर साफ किया।
ओडिशा सरकार ने चक्रवात से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने का दावा किया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि सरकार अब तक किसी की जान नहीं जाने के लक्ष्य को हासिल करने में सफल रही है। उन्होंने इसके लिए भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के आठ जिलों में 634 राहत शिविर बनाए गए हैं। इनमें 23,827 लोगों को सुरक्षित रखा गया है। शिविरों में भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रभावित लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
राहत एवं बचाव अभियान के लिए कुल 313 टीमें लगाई गई हैं। इनमें ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल की 60 टीमें, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की नौ टीमें और अग्निशमन विभाग की 244 टीमें शामिल हैं।
इसके अलावा, आठ जिलों में आठ मंत्रियों को हालात की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला स्तर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और क्षेत्रीय राजस्व आयुक्त को भी स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
चक्रवात के दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, कुल 2,245 गर्भवती महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया।
सरकार ने बताया कि इन महिलाओं में 931 बच्चों का सुरक्षित जन्म हुआ है और मां-बच्चे दोनों सुरक्षित हैं। राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
भारी बारिश के कारण धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ओडिशा सरकार ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर किसानों को सहायता देने का फैसला लिया जाएगा।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी तूफान से हुए नुकसान और मौजूदा हालात को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बातचीत की। उन्होंने केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है।
मौसम विभाग के अनुसार, तट से टकराने के बाद चक्रवात कमजोर हुआ है। इसके अगले 48 घंटों में उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना जताई गई है।
हालांकि, खतरा पूरी तरह टला नहीं है। 29 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम, विजयनगरम और पार्वतीपुरम मन्यम जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों के साथ मौसम की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
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