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शराब-ड्रग्स के बाद अब ‘Blood Kick’ का नशा! भोपाल में युवाओं का नया खतरनाक शौक, खुद का खून निकालकर कर रहे नसों में इंजेक्ट

मध्य प्रदेश की राजधानी के युवाओं में इन दिनों नशे का एक ऐसा अजीबोगरीब और जानलेवा शौक चढ़ा रहा है, जिसे सुनकर डॉक्टर भी दंग रह गये हैं। शराब और ड्रग्स के बाद अब भोपाल के युवा ‘ब्लड किक’ (Blood Kick) के जाल में फंस रहे हैं। यह खुलासा गांधी मेडिकल कॉलेज से एसोसिएटेड हमीदिया अस्पताल के मनोरोग विभाग में आए कुछ मामलों के बाद हुआ है।

क्या है ‘ब्लड किक’ और क्यों बढ़ रहा है इसका चलन?

मेडिकल वर्ल्ड में इसे ‘ऑटोहेमोथेरेपी एब्यूज’ (Autohemotherapy Abuse) के रूप में देखा जा रहा है। इसमें युवा अपने शरीर से खुद ही खून निकालते हैं और फिर उसी खून को वापस नसों के जरिए शरीर में इंजेक्ट कर लेते हैं। हमीदिया अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक साल में ऐसे करीब 5 मामले सामने आए हैं, जहाँ युवाओं को अपने ही खून के कंपोनेंट्स लेने की लत लग चुकी है।

बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर फैले कुछ वीडियो और गलत जानकारी की वजह से युवा इसे ‘ताकत बढ़ाने’ और ‘एनर्जी बूस्टर’ का जरिया मान रहे हैं।

यह है एक ‘साइकियाट्रिक डिसऑर्डर’ है

हमीदिया अस्पताल के एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह वास्तव में कोई शारीरिक नशा नहीं, बल्कि एक मानसिक एडिक्शन है। इसे ‘सेल्फ-हार्म’ (Self-harm) की केटेगरी में रखा गया है। जब युवा खुद को दर्द देते हैं या खून बहते हुए देखते हैं, तो दिमाग में एक काल्पनिक सुख पैदा होता है, जिसे वे ‘नशा’ समझने लगते हैं। 18 से 25 साल के युवाओं में क्यूरियोसिटी और नेगेटिव पीयर इन्फ्लुएंस की वजह से यह ट्रेंड तेजी से ग्रो कर रहा है।

मौत को दावत देता ‘ऑटोहेमोथेरेपी एब्यूज’

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह प्रोसेस सीधे तौर पर मौत को बुलावा देना है। इसके कुछ सीरियस इफेक्ट इस प्रकार हो सकते हैं:

HIV और हेपेटाइटिस: बिना डॉक्टरी देखरेख के सुई का बार-बार इस्तेमाल जानलेवा संक्रमण फैला सकता है।

सेप्सिस: खून में अशुद्धियाँ जाने से पूरे शरीर का खून जहरीला हो सकता है।

गैंग्रीन का खतरा: गलत तरीके से इन्फ्यूजन लेने से शरीर के अंग सड़ सकते हैं और उन्हें काटने तक की नौबत आ सकती है।

ब्लड क्लॉट: नसों में खून के थक्के जमने से हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा रहता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह


हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, अगर घर के किसी के व्यवहार में अचानक चिड़चिड़ापन, एग्रेसिवनेस या उनके शरीर पर सुइयों के निशान दिखें, तो परिजनों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसे मामलों में प्रोफेशनल काउंसलिंग और मनोरोग एक्सपर्ट्स की सलाह लेना ही एक बेहतर सलूशन है।

news desk

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