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एक दौरा… एक मांग और बंद हो गया एफिल टावर! फ्रांस में क्यों छिड़ी बड़ी बहस?

एफिल टावर, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग पेरिस पहुंचते हैं, वही मशहूर टावर अचानक बंद करना पड़ा। लेकिन वजह कोई तकनीकी खराबी या सुरक्षा खतरा नहीं, बल्कि कर्मचारियों की हड़ताल बनी। मामला एक हिंदू धार्मिक संगठन के निजी दौरे से जुड़ा है, जहां आरोप है कि कुछ महिला कर्मचारियों को वहां से हटाने की मांग की गई। इसके बाद कर्मचारियों ने विरोध शुरू कर दिया और विवाद इतना बढ़ा कि एफिल टावर को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। आखिर ऐसा क्या हुआ कि पेरिस का ये ऐतिहासिक स्मारक सियासी विवाद के केंद्र में आ गया?

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा विवाद पिछले हफ्ते BAPS यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था से जुड़े करीब 100 लोगों के एक निजी दौरे से शुरू हुआ। यह समूह पेरिस के बाहरी इलाके में एक मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए फ्रांस पहुंचा था।

आरोप है कि इस दौरान एफिल टावर प्रबंधन से कुछ समय के लिए महिला कर्मचारियों को वहां से हटाने और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात करने की मांग की गई। इसके बाद मामला कर्मचारियों तक पहुंचा और उन्होंने इस मांग के विरोध में हड़ताल कर दी।

फ्रांस में मचा सियासी बवाल

मामला सामने आते ही फ्रांस की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गेब्रियल अटाल ने कहा कि फ्रांस में महिलाओं को उनकी जगह के बारे में कोई संस्कृति, मान्यता या पूजा-पद्धति निर्देश नहीं दे सकती।

पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने भी घटना को अस्वीकार्य बताया और कहा कि ऐतिहासिक स्मारकों पर महिला-पुरुष समानता से समझौता नहीं किया जा सकता।

वहीं, फ्रांस की समानता मंत्री ओरोर बर्गे ने कहा कि फ्रांस में महिलाओं से खुद को छिपाने या मिटाने के लिए नहीं कहा जाता और कोई भी धर्म या विचार गणतंत्र के कानूनों से ऊपर नहीं है।

BAPS ने क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद BAPS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पक्ष रखा। संगठन ने कहा कि उनके संज्ञान में किसी को भी एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया था।

BAPS के मुताबिक, समूह बड़ा होने के कारण आम लोगों को असुविधा से बचाने के लिए दौरे का समय सामान्य से पहले तय किया गया था। हालांकि, संगठन ने कहा कि वह उठाई गई चिंताओं को गंभीरता से लेता है और इस स्थिति से किसी को ठेस पहुंची या असुविधा हुई हो तो उसके लिए ईमानदारी से माफी मांगता है।

एफिल टावर से शुरू हुआ ये विवाद अब सिर्फ कर्मचारियों की हड़ताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिला समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और फ्रांस के धर्मनिरपेक्ष कानूनों पर बहस का मुद्दा बन गया है। एक धार्मिक समूह के निजी दौरे को लेकर उठे आरोपों ने फ्रांस के राजनीतिक गलियारों को भी गर्म कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच के बाद इस विवाद की असली तस्वीर क्या सामने आती है।

news desk

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