उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी पहचान और प्रतीकों की नई जंग शुरू हो गई है। अब तक केवल ‘लाल टोपी’ और लाल-हरे झंडे के लिए जानी जाने वाली समाजवादी पार्टी (SP) अब ‘नीले रंग’ के रंग में ढलने की तैयारी कर रही है। अखिलेश यादव की पार्टी अपने युवा और छात्र संगठनों के लिए नया ड्रेस कोड लागू करने जा रही है, जिसके तहत छात्र सभा के कार्यकर्ता अब नीली (Blue) टी-शर्ट और जींस में नजर आएंगे।
सियासी गलियारों में सपा के इस कदम को सीधे तौर पर बीएसपी (BSP) के पारंपरिक दलित वोट बैंक में सेंधमारी और अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले को और मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
| श्रेणी | पहले का ड्रेस कोड | नया संभावित ड्रेस कोड |
| टी-शर्ट / शर्ट | मैरून (Maroon) रंग | नीला (Blue) रंग |
| लोअर / पैंट | सामान्य पैंट | डेनिम जींस |
| मुख्य उद्देश्य | परंपरागत छात्र राजनीति | दलित जुड़ाव + Gen-Z केंद्रित पहचान |
सपा के इस ‘ब्लू ड्रेस कोड’ प्लान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जोरदार पलटवार किया है। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने सपा पर तंज कसते हुए कहा:
“रंग या पोशाक बदलने से सपा के अतीत के दाग नहीं धुलेंगे। दलित समाज अच्छी तरह जानता है कि अखिलेश यादव के शासनकाल में उनके साथ कैसा व्यवहार हुआ था। यह सिर्फ वोट बैंक के लिए किया जा रहा एक चुनावी ढोंग है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) की ढीली पड़ती पकड़ के बीच सपा ‘नीले रंग’ के इस नए प्रयोग से दलित मतदाताओं, खासकर युवाओं को अपने पाले में लाने का बड़ा दांव खेल रही है। अब देखना यह होगा कि लाल और नीले का यह सियासी कॉम्बिनेशन 2027 में सपा को सत्ता की सीढ़ी तक पहुंचा पाता है या नहीं।
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