नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने टी20 टीम से संजू सैमसन को बाहर किए जाने से जुड़े फैसले पर बड़ा खुलासा किया है। गंभीर ने बताया कि उनके कोचिंग कार्यकाल में यह सबसे मुश्किल फैसलों में से एक था। उन्होंने कहा कि एक तरफ संजू सैमसन टूर्नामेंट के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे, जबकि दूसरी ओर टीम की जरूरत और दूसरे बल्लेबाज की शानदार फॉर्म को देखते हुए बदलाव करना पड़ा।
गंभीर ने जियोस्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में भारतीय टीम के मौजूदा टी20 सेटअप और खिलाड़ियों के चयन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी छोटी असफलता के बाद टीम को लेकर तुरंत घबराने या प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है।
गौतम गंभीर ने संजू सैमसन को टीम से बाहर किए जाने के फैसले को याद करते हुए कहा कि उनके दो साल के कोचिंग कार्यकाल में यह ऐसी रात थी, जब वह सो नहीं पाए थे।
गंभीर ने कहा कि उन्होंने इस बारे में संजू सैमसन से भी बात की थी। उनके मुताबिक, टी20 फॉर्मेट में कोच के तौर पर यह उनके लिए शायद सबसे कठिन फैसला था।
उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रह चुका हो और इसके बाद तीन-चार मैचों में उसे टीम से बाहर करना पड़े, तो फैसला आसान नहीं होता।
गंभीर के मुताबिक, उस समय दूसरे बल्लेबाज की फॉर्म भी शानदार थी और भारत को सीरीज जीतने के लिए शीर्ष क्रम में रन बनाने वाले खिलाड़ी की जरूरत थी।
उन्होंने कहा कि उन्होंने संजू से इस फैसले को लेकर स्पष्ट और ईमानदारी से बातचीत की। गंभीर ने बताया कि उन्होंने सैमसन को समझाया कि दूसरे खिलाड़ी की फॉर्म और टीम की जरूरत को देखते हुए यह बदलाव किया गया है।
गंभीर के अनुसार, संजू ने इस बातचीत को सकारात्मक तरीके से लिया।
गौतम गंभीर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने माना कि शानदार फॉर्म में होने के बावजूद हर युवा खिलाड़ी को तुरंत प्लेइंग इलेवन में जगह मिलना जरूरी नहीं है।
गंभीर ने कहा कि जिन खिलाड़ियों ने लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन किया है, उनके रहते युवा खिलाड़ियों को अपने मौके का इंतजार करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यह युवा खिलाड़ियों के लिए मुश्किल हो सकता है, लेकिन भारतीय टीम में चयन केवल मौजूदा फॉर्म पर नहीं, बल्कि टीम की जरूरत और संयोजन को ध्यान में रखकर भी किया जाता है।
भारतीय मुख्य कोच ने टी20 टीम को लेकर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से भी बचने की बात कही। उन्होंने भारतीय टीम के हालिया प्रदर्शन और पिछले कुछ वर्षों की उपलब्धियों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी एक छोटी असफलता के बाद पूरी व्यवस्था को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।
गंभीर ने टीम का बचाव करते हुए कहा कि भारत ने दो साल के भीतर एक और विश्व कप जीता है और तीसरा विश्व कप जीतने में भी लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा।
भारतीय टीम के लिए आने वाला कार्यक्रम भी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। टीम को न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अहम सीरीज खेलनी हैं। ऐसे में खिलाड़ियों का चयन, फॉर्म और टीम संयोजन चर्चा में रहेगा।
गंभीर के हालिया बयान से यह संकेत मिलता है कि टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म के साथ-साथ टीम की जरूरत और लंबे टूर्नामेंट को ध्यान में रखकर फैसले ले रहा है।
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