लखनऊ। डॉक्टर को धरती का दूसरा भगवान कहा जाता है, लेकिन सोचिए अगर इलाज करने वाला डॉक्टर ही फर्जी निकले तो मरीजों पर क्या गुजरेगी? ऐसा ही चौंकाने वाला मामला उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के मेडिकल कॉलेज में सामने आया है, जहां एक महिला की शिकायत के बाद तीन साल से डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज कर रहा एक फर्जी चिकित्सक बेनकाब हो गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी युवक ने अपने जीजा की डिग्री का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किये और जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) के पद पर नौकरी हासिल कर ली। तीन वर्षों तक उसने गंभीर बीमार मरीजों का इलाज किया और लोगों की जान से खिलवाड़ करता रहा।
सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब आरोपी की अपनी बहन ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को कथित दस्तावेजों और सबूतों के साथ शिकायत दी। शिकायत मिलते ही मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मयंक कुमार शुक्ला सक्रिय हुए और तुरंत जिला प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी दी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
जांच में यह सामने आया कि आरोपी अभिमन्यु सिंह असल में एक इंजीनियर है और उसके पास मेडिकल की कोई डिग्री नहीं है। उसने मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड में मां का नाम शकुंतला देवी और पिता का नाम तिलकराम गुप्ता दर्ज कराया था। इतना ही नहीं, उसने आधार कार्ड भी जीजा की फोटो और नाम लगाकर बनवा लिया था।
राज खुलने के बाद आरोपी अचानक इस्तीफा देकर फरार हो गया। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन में हलचल मच गई है। अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है।
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