एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है
अक्सर फिल्मों या कहानियों में हम सुनते हैं कि “गहरे दुख से दिल टूट गया,” लेकिन एडवांस्ड मेडिकल साइंस ने अब इसे एक सर्टिफाइड बीमारी मान लिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी को खोना, ब्रेकअप या बड़े इमोशनल सदमे के बाद होने वाला सीने का दर्द केवल मेंटली नहीं, बल्कि पूरी तरह फिजिकली होता है। मेडिकल भाषा में इसे ‘ताकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी’ (Takotsubo Cardiomyopathy) या ‘ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम’ कहा जाता है।
क्यों और कैसे होता है ये सिंड्रोम?
हम अक्सर मजाक में कहते हैं कि “मेरा दिल टूट गया,” लेकिन साइंस कहता है कि ये मज़ाक नहीं, ये एक मेडिकल इमरजेंसी है। आसान भाषा में समझें तो गहरा दुख आपके दिल का शेप तक बदल सकता है।
शरीर के अंदर क्या होता है?
जब आप किसी बड़े सदमे (ब्रेकअप, किसी की मौत या भारी स्ट्रेस) से गुजरते हैं, तो शरीर में ‘एड्रेनालिन’ जैसे हार्मोन्स का तूफान आ जाता है। आपके दिल का मुख्य हिस्सा (बायां वेंट्रिकल) अचानक कमज़ोर पड़ जाता है और गुब्बारे की तरह फूल जाता है। दिल सही से ब्लड पंप नहीं कर पाता और आपको बिल्कुल वैसा ही महसूस होता है जैसे हार्ट अटैक आया हो।
इन लक्षणों को हल्के में न लें
लोग अक्सर इसे ‘नॉर्मल घबराहट’ समझकर इग्नोर कर देते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस ने इन लक्षणों को गंभीर बताया हैं:
अचानक चेस्ट पेन: सीने में एकदम से तेज़ चुभन या भारीपन।
सांस की कमी: बैठे-बैठे दम फूलना या ऑक्सीजन कम महसूस होना।
BP का अप-डाउन: ब्लड प्रेशर का अचानक बहुत हाई या बहुत लो हो जाना।
ठंडा पसीना: बिना किसी मेहनत के शरीर का ठंडा पड़ना और पसीना आना।
सिर्फ दिल ही नहीं, पूरा सिस्टम हिल जाता है
डॉक्टर्स का कहना है की ये सिंड्रोम आपके शरीर पर ‘मल्टीपल अटैक’ करता है जैसे ज्यादा दिन तक दुखी रहने से शरीर बीमारियों से लड़ना बंद कर देता है।बीपी के उतार-चढ़ाव से दिमाग की नस फटने का डर रहता है। यह आपको एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद न आने की बीमारी का शिकार बना देता है।
रिसर्च कहती है कि महिलाओं (खासकर मेनोपॉज के बाद) को इसका खतरा पुरुषों से ज्यादा होता है क्योंकि उनके हार्मोनल बदलाव दिल को ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं।
खुद को कैसे बचाएं?
दवाओं से ज्यादा यहाँ आपकी ‘लाइफस्टाइल’ काम आती है:
अपने दुख को अंदर न पालें। दोस्तों, फैमिली या थेरेपिस्ट से बात करें। याद रखें, ‘बोलना’ ही इलाज है। अगर सीने में दर्द हो, तो उसे ‘इमोशनल ड्रामा’ न समझें। तुरंत ECG कराएं। योग, गहरी सांस और मेडिटेशन को अपनी लाइफ का हिस्सा बनाएं। ये आपके दिल को ‘स्ट्रेस प्रूफ’ बनाते हैं।
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