2030 तक खत्म हो जाएंगी IT और BPO कंपनियां
खोसला ने एक और साहसी दावा करते हुए कहा कि 2050 तक, दुनिया में पारंपरिक नौकरियों की जरूरत ही नहीं रहेगी। एआई और रोबोट्स के कारण सामान और सेवाएं इतनी सस्ती और सुलभ हो जाएंगी कि इंसान अपना समय केवल अपनी पसंद और जुनून के कामों में बिता सकेगा।
भारत के लिए क्या है समाधान?
इतनी बड़ी चेतावनियों के बावजूद, विनोद खोसला ने भारत के भविष्य को लेकर आशा व्यक्त की। उन्होंने भारतीय युवाओं और सरकार को तीन मुख्य सुझाव दिए:
भारत को अब ‘सर्विस’ देने के बजाय AI-आधारित प्रोडक्ट्स बनाने और उन्हें दुनिया भर में एक्सपोर्ट करने पर ध्यान देना चाहिए।
सुरक्षा और संप्रभुता के लिए भारत को अमेरिका या चीन के मॉडल्स पर निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के AI मॉडल्स विकसित करने चाहिए।
युवाओं को उन स्किल्स की ओर मुड़ना होगा जहाँ वो AI टूल्स का इस्तेमाल करके नई चीजें बना सकें, न कि पुरानी घिसी-पिटी कोडिंग सीखें।
विनोद खोसला ने ये भी बताया है की “भारत के पास दुनिया के सबसे बेहतरीन इंजीनियर्स हैं। यदि हम इस बदलाव को समय रहते स्वीकार कर लें, तो हम दुनिया के सबसे बड़े AI एक्सपोर्टर बन सकते हैं।”
क्या हमें डरना चाहिए?
खोसला की भविष्यवाणियां डराने वाली लग सकती हैं, लेकिन वो एक नए युग की आहट हैं। जैसा कि समिट में एक्सपर्ट्स ने कहा “AI इंसान को नहीं हटाएगा, बल्कि AI इस्तेमाल करने वाला इंसान, बिना AI वाले इंसान की जगह ले लेगा”।
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