तेहरान/वाशिंगटन। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी महायुद्ध के 24वें दिन एक बड़ी कूटनीतिक हलचल हुई है। मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये जैसे मध्यस्थ देशों ने ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) का एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया है।
हालांकि, शांति की इस पहली गंभीर कोशिश पर ग्रहण लगता दिख रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने न केवल ‘अस्थायी सीजफायर’ को ठुकरा दिया है, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने से भी साफ इनकार कर दिया है।
मध्यस्थों द्वारा तैयार किए गए इस मसौदे में दो चरणों में शांति बहाली की बात कही गई थी:
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भेजे गए इस प्रस्ताव पर तेहरान का रुख बेहद सख्त है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि
एक तरफ शांति की बातें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पारा सातवें आसमान पर है। ट्रंप ने इस सप्ताह चेतावनी दी है कि यदि ईरान शर्तों पर नहीं आता है, तो उसके बिजली संयंत्रों (Power Plants) और पुलों पर भीषण बमबारी की जाएगी। ट्रंप के इस आक्रामक रुख ने मध्यस्थों की कोशिशों पर पानी फेर दिया है।
वहीं, ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि वह अमेरिका के किसी भी ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
‘एक्सियोस’ (Axios) द्वारा उजागर किए गए इस प्रस्ताव के विफल होने का मतलब है कि वैश्विक तेल बाज़ार और सप्लाई चेन पर संकट बरकरार रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद रहना भारत के लिए एलपीजी (LPG) और उर्वरक (Fertilizer) की किल्लत को और बढ़ा सकता है।
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