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45 दिन का ‘शांति प्लान’ या नया युद्ध का जाल? मध्यस्थों के प्रस्ताव पर ईरान का इनकार, ट्रंप की ‘पावर प्लांट’ वाली धमकी से बढ़ी रार

तेहरान/वाशिंगटन। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी महायुद्ध के 24वें दिन एक बड़ी कूटनीतिक हलचल हुई है। मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये जैसे मध्यस्थ देशों ने ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) का एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया है।

हालांकि, शांति की इस पहली गंभीर कोशिश पर ग्रहण लगता दिख रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने न केवल ‘अस्थायी सीजफायर’ को ठुकरा दिया है, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने से भी साफ इनकार कर दिया है।

शांति प्रस्ताव के 2 मुख्य चरण: क्या था प्लान?

मध्यस्थों द्वारा तैयार किए गए इस मसौदे में दो चरणों में शांति बहाली की बात कही गई थी:

  • पहला चरण (45 दिन): एक अस्थायी युद्धविराम लागू करना, ताकि दोनों देश मेज पर बैठकर स्थायी शांति समझौते के लिए आधार तैयार कर सकें।
  • दूसरा चरण (अंतिम समझौता): युद्ध को पूरी तरह खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और ईरान के समृद्ध यूरेनियम (High-enriched Uranium) को देश से बाहर भेजने जैसे तकनीकी समाधान निकालना।

ईरान ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को भेजे गए इस प्रस्ताव पर तेहरान का रुख बेहद सख्त है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि

  • स्थायी समाधान की कमी: अमेरिका केवल समय लेना चाहता है और वह ‘परमानेंट सीजफायर’ के लिए गंभीर नहीं है।
  • वित्तीय क्षतिपूर्ति: ईरान का कहना है कि जब तक युद्ध में हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई और भविष्य में हमले न होने की लिखित गारंटी नहीं मिलती, वह पीछे नहीं हटेगा।
  • होर्मुज का कार्ड: ईरान होर्मुज को अंतिम समझौते से पहले खोलने के पक्ष में नहीं है।

ट्रंप का ‘एग्रेसिव’ मोड़: “पुल और पावर प्लांट उड़ा देंगे”

एक तरफ शांति की बातें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पारा सातवें आसमान पर है। ट्रंप ने इस सप्ताह चेतावनी दी है कि यदि ईरान शर्तों पर नहीं आता है, तो उसके बिजली संयंत्रों (Power Plants) और पुलों पर भीषण बमबारी की जाएगी। ट्रंप के इस आक्रामक रुख ने मध्यस्थों की कोशिशों पर पानी फेर दिया है।

वहीं, ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि वह अमेरिका के किसी भी ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

भारत और दुनिया पर असर

‘एक्सियोस’ (Axios) द्वारा उजागर किए गए इस प्रस्ताव के विफल होने का मतलब है कि वैश्विक तेल बाज़ार और सप्लाई चेन पर संकट बरकरार रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद रहना भारत के लिए एलपीजी (LPG) और उर्वरक (Fertilizer) की किल्लत को और बढ़ा सकता है।

news desk

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