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पत्नी, भाई और रिश्तेदारों की कंपनियों को ठेके? सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल CM पेमा खांडू केस में CBI जांच का दिया आदेश,16 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उनके परिवार के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोपों पर एक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुख्यमंत्री के करीबियों को 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके को सौपने के मामले में सीबीआई (CBI) को जांच करने के सक्त निर्देश दे दिया है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश ‘वॉलंटरी अरुणाचल सेना’ और ‘सेव मोन रीजन फेडरेशन’ द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट अपनी पत्नी, भाइयों और रिश्तेदारों की कंपनियों को दिए हैं।

मामले की वो 5 बड़ी बातें:


आरोप है कि जनवरी 2015 से दिसंबर 2025 के बीच लगभग 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी टेंडर बिना किसी निष्पक्ष प्रक्रिया के आवंटित किए गए।

जांच के घेरे में मुख्य रूप से M/s Brand Eagles (सीएम की पत्नी त्सेरिंग डोल्मा से जुड़ी) और Alliance Trading Co. (उनके भाई त्सेरिंग ताशी से जुड़ी) जैसी फर्में शामिल हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि पेमा खांडू के पिता (पूर्व सीएम दोरजी खांडू) के समय से ही राज्य में एक विशेष पारिवारिक नेटवर्क को ही बड़े सरकारी काम दिए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का मामला है।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए 16 सप्ताह का समय दिया है। साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वे जांच में पूरा सहयोग करें।

कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा है कि राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि टेंडर और भुगतान से जुड़ा कोई भी रिकॉर्ड नष्ट न किया जाए।

राजनीतिक गलियारों में हलचल


पेमा खांडू के लिए यह आदेश एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अरुणाचल सरकार ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी और सीबीआई जांच के आदेश ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

आगे क्या होगा?


अब सीबीआई इस बात की गहराई से जांच करेगी कि क्या इन टेंडर्स में ‘ओपन बिडिंग’ का पालन किया गया था या फिर सत्ता की ताकत का इस्तेमाल कर केवल मुख्यमंत्री के करीबियों को आर्थिक लाभ पहुँचाया गया। जिस पर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार के ठोस सबूत मिलते हैं, तो CBI सीधे FIR दर्ज कर गिरफ्तारियां भी कर सकती है।

news desk

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