उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। लखनऊ स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी की कांति सिंह ने जीत दर्ज कर भाजपा को झटका दिया है, जबकि वाराणसी स्नातक सीट पर मतगणना के दौरान सियासी घमासान देखने को मिला। भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह ने नतीजे घोषित होने से पहले ही हार स्वीकार करने का ऐलान कर दिया।
वहीं, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने चुनावी रुझानों को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए भाजपा की हार की भविष्यवाणी की है।
लखनऊ में कांति सिंह की जीत, भाजपा प्रत्याशी से 17 हजार से ज्यादा वोटों का अंतर
लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें कुल 56,905 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह को 39,778 वोट हासिल हुए। इस तरह कांति सिंह ने 17,127 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
यह नतीजा सपा के लिए अहम माना जा रहा है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों की पकड़ को लेकर भी इस जीत के बाद चर्चा तेज हो गई है।
वाराणसी में मतगणना के बीच भाजपा उम्मीदवार ने स्वीकार की हार
वाराणसी स्नातक एमएलसी सीट पर मतगणना 29 अक्टूबर को भी जारी रही। सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा बढ़त बनाए हुए थे। इसी बीच भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने फेसबुक पोस्ट के जरिए जनादेश स्वीकार करने की बात कही।
उन्होंने लिखा कि वह जनादेश को विनम्रता और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करते हैं। अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने समर्थकों के स्नेह, सहयोग और विश्वास के लिए आभार जताया।
इस सीट पर मतगणना को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने धांधली का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन भी किया। भाजपा की ओर से दोबारा मतगणना की मांग किए जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय वाराणसी स्नातक सीट का आधिकारिक परिणाम घोषित नहीं हुआ था।
अवधेश प्रसाद का दावा-2027 में भाजपा की होगी हार
एमएलसी चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि चुनावी नतीजे अखिलेश यादव के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का संकेत हैं।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है और प्रदेश में बदलाव की भावना मजबूत हो रही है। अवधेश प्रसाद ने भविष्यवाणी की कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि, एमएलसी चुनाव के नतीजों के आधार पर विधानसभा चुनाव के परिणामों का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी। दोनों चुनावों का मतदाता वर्ग और राजनीतिक समीकरण अलग-अलग हो सकते हैं।
यूपी एमएलसी चुनाव में सपा और भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहा?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के द्विवार्षिक चुनाव में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। उपलब्ध परिणामों के मुताबिक, भाजपा ने मेरठ और आगरा स्नातक सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट सपा के खाते में गई।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी मुकाबला दिलचस्प रहा। लखनऊ, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीटों पर भाजपा उम्मीदवार जीते, जबकि वाराणसी और आगरा शिक्षक सीटों पर सपा ने जीत हासिल की।
लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की जीत और वाराणसी में पार्टी उम्मीदवार की बढ़त ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया। वाराणसी स्नातक सीट के अंतिम आधिकारिक नतीजे पर सभी की नजरें टिकी रहीं।
2027 से पहले यूपी की सियासत में क्या है इन नतीजों का संदेश?
एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सपा इन परिणामों को अपने समर्थन में बदलाव के संकेत के रूप में पेश कर रही है, जबकि भाजपा के लिए अपने पारंपरिक मतदाता वर्गों में पकड़ बनाए रखना अहम होगा।
फिलहाल, इन नतीजों से प्रदेश की राजनीति में विपक्ष को मुद्दा जरूर मिला है, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव की तस्वीर का आकलन व्यापक राजनीतिक परिस्थितियों, गठबंधनों और क्षेत्रवार जनसमर्थन के आधार पर ही किया जा सकेगा।