नई दिल्ली: गर्मियों में जब मैदानी शहर भीषण गर्मी से तप रहे होते हैं, तब हिल स्टेशन का सुहावना मौसम सुकून देता है। दोपहर में यहां हल्के कपड़ों में घूमना अच्छा लगता है, लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है, ठंडी हवा का एहसास होने लगता है। कई बार शाम होते-होते जैकेट पहनने की जरूरत पड़ जाती है। आखिर ऐसा क्यों होता है? इसकी वजह सिर्फ पहाड़ों की ऊंचाई नहीं, बल्कि सूरज की गर्मी, साफ आसमान, हवा और पहाड़ों की बनावट भी है।
ऊंचाई पर जाते ही क्यों कम होने लगता है तापमान?
भारत के ज्यादातर मशहूर हिल स्टेशन समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर बसे हैं। वायुमंडल में ऊंचाई बढ़ने के साथ आमतौर पर तापमान कम होता जाता है। इसकी एक प्रमुख वजह हवा का कम दबाव है। ऊपर उठने पर हवा फैलती है और ठंडी हो जाती है।
इसी कारण गर्मियों में भी पहाड़ी इलाकों का तापमान मैदानी शहरों की तुलना में कम रह सकता है। दिन में धूप होने के बावजूद यहां मौसम सुहावना महसूस होता है। सूरज ढलने के बाद जब सतह ठंडी होने लगती है, तो आसपास की ठंडी हवा का एहसास और बढ़ जाता है।
सूरज छिपते ही जमीन अपनी गर्मी क्यों खोने लगती है?
दिन में सूरज की किरणें जमीन, सड़कों, इमारतों और दूसरी सतहों को गर्म करती हैं। लेकिन सूरज ढलने के बाद जमीन को सौर ऊर्जा मिलना बंद हो जाता है। इसके बाद वह इंफ्रारेड विकिरण के जरिए गर्मी बाहर छोड़ने लगती है।
इस प्रक्रिया से जमीन के पास की हवा भी ठंडी होने लगती है। पहाड़ी इलाकों में यह बदलाव खास तौर पर साफ आसमान और शांत मौसम के दौरान महसूस हो सकता है।
यही वजह है कि दोपहर में आरामदायक लगने वाला मौसम शाम होते ही ठंडा महसूस होने लगता है। हालांकि, तापमान कितनी तेजी से गिरेगा, यह उस जगह के मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
साफ आसमान में ज्यादा ठंड और बादलों में कम क्यों?
रात के तापमान पर आसमान में मौजूद बादलों का भी असर पड़ता है। जब आसमान साफ होता है, तो जमीन से निकलने वाली गर्मी अंतरिक्ष की ओर ज्यादा आसानी से जा सकती है। इससे सतह तेजी से ठंडी हो सकती है।
इसके उलट, बादल जमीन से निकलने वाले इंफ्रारेड विकिरण का कुछ हिस्सा वापस नीचे की ओर भेजते हैं। इससे जमीन और उसके आसपास की हवा अपेक्षाकृत गर्म रह सकती है।
यही कारण है कि एक ही हिल स्टेशन पर साफ आसमान वाली रात ज्यादा ठंडी लग सकती है, जबकि बादलों से घिरी रात में ठंड कुछ कम महसूस हो सकती है।
पहाड़ों की हवा और घाटियों का भी है बड़ा रोल
ठंड कितनी महसूस होगी, यह केवल थर्मामीटर में दर्ज तापमान पर निर्भर नहीं करता। तेज हवा शरीर से गर्मी तेजी से दूर ले जाती है, जिससे वास्तविक तापमान से ज्यादा ठंड महसूस हो सकती है।
पहाड़ों की बनावट भी रात के तापमान को प्रभावित करती है। साफ और शांत रातों में ठंडी, घनी हवा ढलानों से नीचे घाटियों की ओर बहकर जमा हो सकती है। इस वजह से कभी-कभी घाटियों का तापमान आसपास के ऊंचे स्थानों से भी कम हो जाता है।
नमी, बादलों की मौजूदगी और हवा की गति भी इस अंतर को प्रभावित करती हैं। इसलिए हर हिल स्टेशन पर शाम की ठंड एक जैसी नहीं होती।
हिल स्टेशन जा रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप गर्मियों में पहाड़ों पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो केवल दिन के तापमान को देखकर कपड़े पैक न करें। रात के न्यूनतम तापमान का पूर्वानुमान भी जरूर देखें।
- शाम और रात के लिए हल्की जैकेट या गर्म कपड़ा साथ रखें।
- तेज हवा या बारिश की संभावना हो तो विंडप्रूफ या वॉटरप्रूफ जैकेट रखें।
- खुले स्थानों पर देर तक बैठने या घूमने की योजना है, तो अतिरिक्त गर्म कपड़े काम आ सकते हैं।
- मौसम की जानकारी यात्रा के दौरान भी देखते रहें, क्योंकि पहाड़ों में परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।
कुल मिलाकर, गर्मियों में भी हिल स्टेशन पर सूरज ढलते ही ठंड बढ़ने की वजह ऊंचाई, जमीन का गर्मी खोना, साफ आसमान और स्थानीय हवाओं का संयुक्त प्रभाव है। दिन की धूप भले ही गर्म महसूस हो, लेकिन शाम होते ही पहाड़ों का मौसम अपना ठंडा मिजाज दिखाने लगता है।