नई दिल्ली: शरीर में आयोडीन की कमी को अक्सर लोग मामूली पोषण संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका असर थायरॉयड ग्रंथि के कामकाज से लेकर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास तक पड़ सकता है। AIIMS नई दिल्ली ने विश्व आयोडीन डेफिशियेंसी डे 2026 के मौके पर पर्याप्त आयोडीन लेने की अहमियत बताई है। संस्थान के मुताबिक, शिशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आयोडीन की जरूरत पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
आयोडीन एक जरूरी पोषक तत्व है, जिसका इस्तेमाल शरीर थायरॉयड हार्मोन बनाने में करता है। ये हार्मोन मेटाबॉलिज्म, वृद्धि और शरीर की कई अहम प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। इसकी कमी होने पर हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है और लंबे समय तक कमी बनी रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
आयोडीन की कमी से हो सकती हैं ये परेशानियां
शरीर में लंबे समय तक पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलने पर थायरॉयड ग्रंथि का आकार बढ़ सकता है, जिसे घेंघा कहा जाता है। इसके अलावा हाइपोथायरॉयडिज्म यानी थायरॉयड हार्मोन का कम उत्पादन होने का खतरा भी हो सकता है।
गर्भावस्था और बचपन के दौरान आयोडीन की गंभीर कमी विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि इस समय मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र का विकास हो रहा होता है। पर्याप्त आयोडीन न मिलने से बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।
आयोडीन की कमी के ये संकेत दिखें तो रहें सतर्क
आयोडीन की कमी के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। इनकी गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि कमी कितनी है और कितने समय से बनी हुई है। कुछ संभावित संकेत इस प्रकार हैं:
- गर्दन के सामने वाले हिस्से में सूजन दिखाई देना।
- थकान, सुस्ती और कमजोरी महसूस होना।
- दूसरों की तुलना में ठंड ज्यादा लगना।
- बच्चों में शारीरिक वृद्धि और विकास प्रभावित होना।
ध्यान दें कि ये लक्षण दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर आयोडीन की कमी या थायरॉयड की बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से जांच कराएं।
किन लोगों को आयोडीन की मात्रा पर देना चाहिए खास ध्यान?
AIIMS की ओर से साझा जानकारी के मुताबिक, कुछ आयु वर्गों और स्थितियों में पर्याप्त आयोडीन मिलना विशेष रूप से जरूरी है।
- शिशु: शुरुआती विकास के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा जरूरी है।
- बच्चे और किशोर: शारीरिक वृद्धि और मस्तिष्क के विकास के लिए यह पोषक तत्व अहम है।
- गर्भवती महिलाएं: इस दौरान मां के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए भी पर्याप्त आयोडीन जरूरी होता है।
- स्तनपान कराने वाली महिलाएं: मां के दूध के जरिए बच्चे को आयोडीन मिलता है, इसलिए इस अवधि में भी पर्याप्त सेवन पर ध्यान देना चाहिए।
आखिर आयोडीन की कमी क्यों होती है?
आयोडीन की कमी का एक प्रमुख कारण भोजन में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा न होना है। अगर कोई व्यक्ति आयोडीन युक्त नमक की जगह बिना आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल करता है, तो उसकी डाइट में आयोडीन की मात्रा कम हो सकती है।
कुछ क्षेत्रों की मिट्टी और वहां पैदा होने वाले खाद्य पदार्थों में भी आयोडीन कम हो सकता है। इसके अलावा गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान शरीर की आयोडीन संबंधी जरूरत बढ़ जाती है। ऐसे में संतुलित आहार और पर्याप्त आयोडीन का सेवन महत्वपूर्ण हो जाता है।
आयोडीन की कमी से बचने के लिए क्या करें?
AIIMS ने रोजाना खाना बनाने में आयोडीन युक्त नमक इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसके अलावा संतुलित आहार में दूध, अंडे, मछली और अन्य डेयरी उत्पाद शामिल किए जा सकते हैं। इन खाद्य पदार्थों में आयोडीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है।
हालांकि, आयोडीन युक्त नमक का मतलब ज्यादा नमक खाना नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, वयस्कों को प्रतिदिन कुल नमक का सेवन 5 ग्राम से कम रखना चाहिए। बच्चों के लिए नमक की उचित मात्रा उनकी उम्र और जरूरत के अनुसार अलग हो सकती है।
अगर आपको आयोडीन की कमी या थायरॉयड संबंधी समस्या का संदेह है, तो डॉक्टर से सलाह लें। बिना चिकित्सकीय परामर्श के आयोडीन सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है, क्योंकि जरूरत से ज्यादा आयोडीन भी थायरॉयड के कामकाज को प्रभावित कर सकता है।