नई दिल्ली: फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है। सितंबर में कुछ स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन अक्टूबर तक कई शहरों में फैल गया। इस दौरान दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। हालात को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वीडियो जारी कर प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 2,400 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मैक्रों ने हिंसा पर जताई नाराजगी
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को जारी वीडियो में हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि फ्रांस के लोग अपने ही देश के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाओं को किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता और हिंसा को लेकर सभी शर्म महसूस कर रहे हैं।
मैक्रों ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वालों की शिकायतें जायज हैं। उनकी मांगों को तोड़फोड़ और हिंसा करने वालों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। शनिवार और रविवार को हुई घटनाओं के बाद सरकार के सामने हालात संभालने की चुनौती और बढ़ गई है।
महंगाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी
रॉयटर्स के मुताबिक, फ्रांस में विरोध प्रदर्शन के पीछे महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक असमानता, सरकारी खर्च और राजनीति से जुड़ी शिकायतें हैं। ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों के साथ स्कूलों में शिक्षकों की कमी और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।
प्रदर्शन की शुरुआत पेरिस के उत्तरी उपनगरों के कुछ स्कूलों से हुई थी। वहां छात्रों और उनके परिवारों ने शिक्षकों की कमी, पढ़ाई पर पड़ रहे असर और स्कूलों की खराब हालत को लेकर शिकायतें उठाई थीं। धीरे-धीरे यह विरोध दूसरे इलाकों तक पहुंचा और कई जगह हिंसक हो गया।
पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शन
रॉयटर्स के अनुसार, पेरिस, मार्सेई, लियोन, बोर्डो और लिमोज जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शन का असर ज्यादा दिखाई दिया है। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे आंदोलन में 16, 17 और 18 अक्टूबर को कई जगह हिंसक घटनाएं हुईं।
पेरिस और मार्सेई में प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की कोशिश की। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए बल प्रयोग किया। इन घटनाओं के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।
5.5 लाख लोगों के शामिल होने का दावा
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन में करीब 5.5 लाख लोगों के शामिल होने की जानकारी दी है। इनमें से ज्यादातर लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन कुछ समूहों ने पुलिस और सार्वजनिक संपत्ति को निशाना बनाया।
पिछले तीन दिनों में हुई हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं ने कारोबारियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
लिमोज में ऐतिहासिक टाउन हॉल का क्लॉक टावर जला
लिमोज शहर में रविवार को प्रदर्शन के दौरान ऐतिहासिक टाउन हॉल के क्लॉक टावर में आग लगा दी गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आग से टावर को भारी नुकसान पहुंचा और वह जलने के बाद गिर गया। घटना के बाद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि टाउन हॉल में आग लगाए जाने से वहां मौजूद लोगों की जान को खतरा पैदा हो गया था। वहीं, संबंधित क्षेत्र के एक अधिकारी ने कहा कि अगर इमारत की मरम्मत नहीं कराई गई तो वह इस्तीफा दे देंगे।
नुकसान की भरपाई दंगाइयों से कराने की तैयारी
अर्थव्यवस्था मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने हिंसा में नुकसान झेलने वाले कारोबारियों की मदद करने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ करने वालों को नुकसान की भरपाई करनी होगी और हिंसा फैलाने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
फ्रेंच ब्रॉडकास्टर BFMTV को एक अधिकारी ने बताया कि एक कंपनी की 50 दुकानों को नुकसान पहुंचा है। इनमें से 20 दुकानों में लूटपाट हुई। हालांकि, नुकसान की अनुमानित लागत के बारे में उपलब्ध रिपोर्ट में आंकड़ा स्पष्ट नहीं है।
2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
फ्रांस में जारी विरोध को अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। बीबीसी के मुताबिक, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आरोप लगाया था कि विपक्ष राष्ट्रपति चुनाव से पहले छात्रों के गुस्से का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।
प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए जाने-माने एक्टिविस्ट जेरोम रोड्रिग्स ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील की थी। एक वीडियो में उन्होंने कहा कि विरोध के जरिए उन लोगों की आवाज सामने आनी चाहिए जो बेहतर जीवन चाहते हैं और जिन्हें रोजमर्रा के खर्चों के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि गुस्से की कोई राजनीतिक पार्टी नहीं होती और खाली फ्रिज की भी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं होती। ऐसे में फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शन का असर केवल मौजूदा हालात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले की राजनीतिक बहस के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।