अजीत अगरकर के बाद चयन समिति की कमान संभालने का दावा, शिव सुंदर दास, आरपी सिंह, अजय रात्रा और रमेश पोवार भी समिति में शामिल होने की खबर…
भारतीय क्रिकेट में प्रज्ञान ओझा का नाम एक बार फिर चर्चा में है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी से पहचान बनाने वाले पूर्व भारतीय स्पिनर को भारतीय क्रिकेट टीम का नया मुख्य चयनकर्ता बनाए जाने की खबर सामने आई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजीत अगरकर के बाद अब प्रज्ञान ओझा को चयन समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि उन्हें पहले अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन अब पूर्णकालिक मुख्य चयनकर्ता नियुक्त कर दिया गया है।
हालांकि, इस नियुक्ति और चयन समिति की नई संरचना की आधिकारिक पुष्टि बीसीसीआई के बयान से की जानी चाहिए। अगर यह बदलाव आधिकारिक तौर पर लागू हुआ है, तो ओझा के सामने भारतीय टीम के भविष्य के संयोजन, खिलाड़ियों के चयन और आगामी प्रतियोगिताओं के लिए मजबूत टीम तैयार करने की अहम जिम्मेदारी होगी।
नई चयन समिति में कौन-कौन शामिल?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रज्ञान ओझा की अगुवाई वाली चयन समिति में शिव सुंदर दास, आरपी सिंह, अजय रात्रा और रमेश पोवार के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि मुख्य चयनकर्ता पद के लिए वसीम जाफर, रमेश पोवार, कोनोर विलियम्स और जैकब मार्टिन ने आवेदन किया था, लेकिन अंततः ओझा को जिम्मेदारी दी गई।
नई चयन समिति का काम खिलाड़ियों के मौजूदा प्रदर्शन, फिटनेस, टीम की जरूरतों और भविष्य की योजनाओं के आधार पर चयन संबंधी फैसले लेना होगा।
भारत के लिए ऐसा रहा प्रज्ञान ओझा का रिकॉर्ड
प्रज्ञान ओझा ने भारतीय टीम के लिए टेस्ट, वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। उनके करियर के आंकड़ों के मुताबिक, उन्होंने 24 टेस्ट मैचों में 113 विकेट लिए। वहीं, 18 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में उनके नाम 21 विकेट और छह टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 10 विकेट दर्ज हैं।
बाएं हाथ के स्पिनर के तौर पर ओझा ने खास तौर पर टेस्ट क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी। उनकी गेंदबाजी में विविधता और विकेट लेने की क्षमता ने उन्हें भारतीय टीम में जगह दिलाई थी।
सचिन तेंदुलकर के आखिरी टेस्ट में बने थे मैच के हीरो
प्रज्ञान ओझा के अंतरराष्ट्रीय करियर से जुड़ा सबसे चर्चित प्रसंग सचिन तेंदुलकर के आखिरी टेस्ट मैच से जुड़ा है। नवंबर 2013 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए टेस्ट में भारतीय टीम ने पारी और 126 रन से जीत हासिल की थी। यही मुकाबला सचिन तेंदुलकर के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी टेस्ट था।
इस मैच में ओझा ने दोनों पारियों में पांच-पांच विकेट लेकर कुल 10 विकेट हासिल किए थे। उनके शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इस ऐतिहासिक मुकाबले में एक ओर सचिन के संन्यास ने सुर्खियां बटोरीं, तो दूसरी ओर ओझा की गेंदबाजी ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि, इस मैच के बाद ओझा भारतीय टीम में दोबारा अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेल सके। उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आगे न बढ़ पाना क्रिकेट प्रशंसकों के बीच आज भी चर्चा का विषय रहा है।
अब चयनकर्ता की भूमिका में नई पारी
एक खिलाड़ी के तौर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने के बाद प्रज्ञान ओझा के लिए मुख्य चयनकर्ता की भूमिका एक अलग तरह की चुनौती होगी। इस पद पर उन्हें व्यक्तिगत प्रदर्शन से आगे बढ़कर पूरी टीम की जरूरतों, खिलाड़ियों के विकल्पों और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखकर फैसले लेने होंगे।
अगर उनकी नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह उनके क्रिकेट करियर का एक नया अध्याय होगा। अब उनकी भूमिका केवल विकेट लेने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए सही खिलाड़ियों की पहचान और टीम के संतुलन से जुड़े फैसलों में भी अहम होगी।