- टीम इंडिया के संतुलन पर गावस्कर की चिंता, बोले- आठवें नंबर तक बल्लेबाजी के लिए गेंदबाजी से समझौता ठीक नहीं
- वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन पर उठे सवाल, सुनील गावस्कर ने चार विशेषज्ञ गेंदबाजों को टीम में रखने की दी सलाह
भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर की टीम चयन और रणनीति को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने टीम में बल्लेबाजी की गहराई बढ़ाने के लिए ऑलराउंडर खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि आठवें नंबर तक बल्लेबाजी की क्षमता विकसित करने के प्रयास में टीम इंडिया के गेंदबाजी विभाग की मजबूती प्रभावित हो सकती है।
गावस्कर ने जियोस्टार के ‘हायर क्रिकेट लाइव’ कार्यक्रम में अपनी राय रखते हुए कहा कि टी20 क्रिकेट में केवल लंबी बल्लेबाजी लाइनअप होना ही जीत की गारंटी नहीं है। विरोधी टीम को बड़े स्कोर बनाने से रोकने के लिए कम से कम चार विशेषज्ञ गेंदबाजों का होना जरूरी है। उनके मुताबिक, पांचवें और छठे गेंदबाज की भूमिका ऑलराउंडर निभा सकते हैं, लेकिन उनके भरोसे मुख्य गेंदबाजी आक्रमण की ताकत कम करना सही रणनीति नहीं है।
250 रन के लक्ष्य ने खोली गेंदबाजी की कमजोरी
गावस्कर की यह टिप्पणी भारत और वेस्टइंडीज के बीच हाल ही में समाप्त हुई टी20 सीरीज के प्रदर्शन के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। सीरीज के दूसरे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत के 249 रन के लक्ष्य को 18.3 ओवर में हासिल कर लिया था। इसके अलावा, चौथे मुकाबले में भी भारतीय गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे और टीम को हार का सामना करना पड़ा।
वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। चार पारियों में से तीन में वेस्टइंडीज का स्कोर 200 रन के पार पहुंचा। ऐसे प्रदर्शन ने भारतीय टीम के गेंदबाजी संयोजन और बड़े स्कोर का बचाव करने की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए।
गावस्कर के अनुसार, बल्लेबाजी में अतिरिक्त विकल्प जुटाने के बजाय टीम प्रबंधन को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उसके पास पूरे 20 ओवर में प्रभावी गेंदबाजी करने के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ विकल्प मौजूद हों।
ऑलराउंडर की भूमिका अहम, लेकिन विशेषज्ञ गेंदबाजों का विकल्प नहीं
सुनील गावस्कर ने अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे ऑलराउंडर टीम के लिए उपयोगी हैं, जो अपने निर्धारित ओवर पूरे करने के साथ बल्लेबाजी में भी योगदान दे सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑलराउंडर की उपयोगिता और विशेषज्ञ गेंदबाज की भूमिका को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
उनकी दलील है कि अगर टीम आठवें नंबर तक बल्लेबाजी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेषज्ञ गेंदबाज को बाहर रखती है, तो इससे विपक्षी टीम के बड़े स्कोर को रोकने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। टी20 क्रिकेट में जहां कुछ ही ओवरों में मैच का रुख बदल जाता है, वहां गेंदबाजी के मजबूत विकल्प निर्णायक साबित होते हैं।
हार्दिक पांड्या का विकल्प तलाशने में जल्दबाजी न करे टीम
गावस्कर ने हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी में उनके जैसे खिलाड़ी की तलाश को लेकर भी टीम प्रबंधन को सलाह दी। उन्होंने कहा कि हार्दिक जैसे ऑलराउंडर आसानी से नहीं मिलते। ऐसे में उनके विकल्प की तलाश में टीम का संतुलन बिगाड़ने से बचना चाहिए।
उन्होंने नमन धीर जैसे खिलाड़ियों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया, जो मुख्य रूप से बल्लेबाज हैं और जरूरत पड़ने पर दो से तीन ओवर गेंदबाजी कर सकते हैं। इस तरह के खिलाड़ियों से टीम को अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प मिल सकता है, लेकिन मुख्य गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी विशेषज्ञ गेंदबाजों के पास ही रहनी चाहिए।
टीम इंडिया के सामने संतुलन बनाने की चुनौती
भारत और वेस्टइंडीज की टी20 सीरीज 2-2 से बराबर समाप्त हुई। सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या बल्लेबाजी को आठवें नंबर तक मजबूत बनाने की रणनीति टीम की गेंदबाजी पर भारी पड़ रही है।
गावस्कर ने पिचों को दोष देने के बजाय गेंदबाजों की सटीकता और टीम संयोजन पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उनकी टिप्पणी से स्पष्ट है कि भारतीय टीम के सामने चुनौती केवल अधिक बल्लेबाजी विकल्प जुटाने की नहीं, बल्कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बीच सही संतुलन कायम करने की भी है। अब देखना होगा कि आगामी मुकाबलों में टीम प्रबंधन इस सुझाव को कितनी गंभीरता से लेता है।