भारतीय राजनीति के गलियारों में इस समय एक ऐसी सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसने सियासी पंडितों को भी हैरान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का उग्र प्रदर्शन और उसके नेताओं (सौरव दास और आशुतोष रांका) की गिरफ्तारी के बाद अब राजनीति में नया भूचाल आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब संसद के भीतर लगातार एनडीए सरकार का साथ देने वाले आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी का रुख अचानक पूरी तरह बदल गया। रेड्डी के इस कदम ने एनडीए खेमे में चिंता बढ़ा दी है और हर तरफ बस यही चर्चा है कि आखिर पर्दे के पीछे क्या पक रहा है।
जगन मोहन रेड्डी का यू-टर्न और सीजेपी को समर्थन
मुख्य चुनाव आयोग के फैसलों और सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध के बीच वाईएस जगन मोहन रेड्डी का समर्थन सामने आने से राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेड्डी ने खुलकर दुख जताते हुए यह स्वीकार किया है कि उन्हें उस चयन प्रक्रिया से सहमत नहीं होना चाहिए था जिसके जरिए चुनाव आयुक्तों का चुनाव किया जाता है।
इस तीन-सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, पीएम द्वारा नामित एक मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कानून में बदलाव की मांग करते हुए इस समिति में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी शामिल किए जाने की पुरजोर वकालत की है।
लेफ्ट पार्टियों से तालमेल और वाईएसआरसीपी की रणनीति
वाईएस जगन मोहन रेड्डी द्वारा उठाए गए इस अचानक कदम के पीछे राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि इसके पीछे लेफ्ट पार्टियों के साथ उनका बढ़ता तालमेल हो सकता है, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इस मामले पर सफाई देते हुए YSRCP के नेता ने स्पष्ट किया कि वे मुद्दों के आधार पर एनडीए का समर्थन करते हैं, लेकिन इस विशेष मुद्दे पर उन्हें लगता है कि जनता को सरकार की तरफ से और अधिक स्पष्टता और आश्वासन की जरूरत है।
टीडीपी और राज्य चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
वाईएसआरसीपी के नेता ने आंध्र प्रदेश की राजनीति पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में मुख्य विपक्षी दल होने के नाते उनका यह कर्तव्य बनता है कि वे उन लोगों के हितों की रक्षा करें जिनके वोट गैरकानूनी तरीके से काटे गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश की टीडीपी सरकार राज्य चुनाव आयोग की मिलीभगत से उसके इशारों पर काम कर रही है और इस पूरे सिस्टम का राजनीतिक फायदा उठा रही है। इसी वजह से उनकी पार्टी ने सीजेपी के इस संघर्ष में समर्थन देने का फैसला किया है।