आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी और महानवमी का पर्व सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए नवरात्रि उत्सव में तिथियों के गणित ने भक्तों के मन में एक बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। अमूमन अलग-अलग दिनों पर मनाई जाने वाली अष्टमी और नवमी इस बार समय के ऐसे दुर्लभ फेरबदल के बीच आई हैं कि दोनों तिथियों की पूजा और कन्या पूजन एक ही दिन पड़ रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी का महासंगम हो रहा है। आइए जानते हैं कि इस दुर्लभ संयोग में किस समय पूजन और कन्या खिलाना शास्त्रों के अनुसार शुभ रहेगा।
कब शुरू और खत्म होगी अष्टमी-नवमी?
पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्त होगी। 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने के कारण उदया तिथि के नियम से महाअष्टमी 19 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी।
वहीं, नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। इस गणना के कारण 19 अक्टूबर को ही सुबह अष्टमी और उसके बाद नवमी की पूजा का योग बन रहा है।
क्या है कन्या पूजन का सही समय
जो भक्त परंपरा के अनुसार महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, वे 19 अक्टूबर को सुबह अष्टमी तिथि रहते पूजन कर सकते हैं; इसके लिए सुबह 8:29 बजे से 10:16 बजे तक का समय सबसे शुभ रहेगा।
वहीं, जो लोग महानवमी पर कन्या पूजन करते हैं, उनके लिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद नवमी तिथि शुरू होने पर कन्याओं को भोजन कराना उत्तम रहेगा।
आठवें व नौवें दिन की देवियां
नवरात्रि के आठवें दिन मां के सौम्य, शांति और पवित्रता के प्रतीक मां महागौरी स्वरूप की आराधना की जाती है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
वहीं, नौवें दिन नवदुर्गा के अंतिम स्वरूप मां सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की कृपा से भक्तों को संपूर्ण आध्यात्मिक शक्तियां और सिद्धियों का वरदान प्राप्त होता है।
इस बार पंचांग के अनुसार 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी की पूजा का संयोग बन रहा है। भक्त तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार कन्या पूजन का समय तय करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की आराधना सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना से की जाती है।