नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से हो रही है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता की सवारी हाथी होगी। हिंदू धर्म में हाथी को संपन्नता, जल और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में माता के हाथी पर सवार होकर आने को लेकर कई तरह की धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि इसका असर वर्षा, फसल, आर्थिक स्थिति से लेकर देश-दुनिया के माहौल तक पर पड़ सकता है।
अच्छी बारिश और बेहतर फसल का संकेत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब माता हाथी पर सवार होकर आती हैं तो इसे अच्छी वर्षा और बेहतर फसल का संकेत माना जाता है। माना जाता है कि इससे वातावरण में शुद्धता आती है और लोगों के रोग-दोष दूर होते हैं। किसानों और कृषि से जुड़े लोगों के लिए भी इसे शुभ संकेत के तौर पर देखा जाता है।
देश-दुनिया में शांति और स्थिरता की मान्यता
माता की सवारी हाथी होने को देश-दुनिया में शांति और स्थिरता से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि वैश्विक स्तर पर बनी अशांति कम हो सकती है और तनावपूर्ण परिस्थितियों में सुधार आ सकता है।
यह भी माना जाता है कि विरोधी देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुल सकता है और मैत्रीपूर्ण संबंधों की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं। समाज में सुख-शांति और आपसी भाईचारे की भावना मजबूत होने की भी मान्यता है।
आर्थिक स्थिति में मजबूती के संकेत
धार्मिक मान्यताओं में हाथी को धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से माता के हाथी पर सवार होकर आने को आर्थिक दृष्टि से भी शुभ माना जाता है।
मान्यता के अनुसार नवरात्रि के बाद लोगों की आर्थिक स्थिति में स्थिरता आ सकती है। शेयर बाजार और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में तेजी देखने को मिल सकती है और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना मानी जाती है।
राजनीति में भी बदलाव के संकेत
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार माता के हाथी पर सवार होकर आने का प्रभाव राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है। माना जाता है कि ऐसे समय में सत्ता और विपक्ष के बीच चल रहा टकराव कम हो सकता है।
वैश्विक राजनीति में भी तनाव घटने और स्थिरता बढ़ने की संभावना जताई जाती है। हालांकि ये बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
माता की सवारी को लेकर क्या कहता है श्लोक?
माता की सवारी से जुड़ा एक प्रचलित श्लोक है—
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमै तुरंगमे।
गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥
इसका अर्थ है कि नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार को होने पर माता हाथी पर सवार होकर आती हैं। मंगलवार या शनिवार से नवरात्रि शुरू होने पर उनकी सवारी घोड़ा मानी जाती है। बुधवार से नवरात्रि की शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती हैं, जबकि गुरुवार और शुक्रवार को शुरुआत होने पर माता की सवारी पालकी या डोली मानी जाती है।