नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। मेडिकल टीम ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उनकी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन के बाद एक बार फिर कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति को समझना जरूरी हो गया है। आखिर कार्डियक अरेस्ट क्या होता है, यह हार्ट अटैक से कैसे अलग है और ऐसी आपात स्थिति में क्या किया जाना चाहिए?
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक नहीं हैं
अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समस्या समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल की नसों में रुकावट के कारण हृदय तक रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है।
वहीं, कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युत प्रणाली में अचानक गड़बड़ी होती है। इसके कारण दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है और वह शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक रक्त पंप करना बंद कर देता है।
हालांकि, दोनों स्थितियों का आपस में संबंध भी हो सकता है। हार्ट अटैक के कारण हृदय की विद्युत गतिविधि प्रभावित होने पर कार्डियक अरेस्ट की स्थिति पैदा हो सकती है।
बिना चेतावनी के भी आ सकता है कार्डियक अरेस्ट
कार्डियक अरेस्ट का सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह कई मामलों में अचानक और बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के हो सकता है। व्यक्ति अचानक गिरकर बेहोश हो सकता है। उसकी नब्ज महसूस नहीं होती और सांस रुक सकती है।
कुछ मामलों में कार्डियक अरेस्ट से पहले सीने में असहजता, सांस फूलना, कमजोरी या दिल की धड़कन बहुत तेज होने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में पहले से ऐसे संकेत दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
इन लोगों में अधिक हो सकता है जोखिम
जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक हो चुका है, उनमें कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक हो सकता है। परिवार में हृदय संबंधी बीमारियों का इतिहास भी जोखिम बढ़ा सकता है।
इसके अलावा दिल का आकार बढ़ना, जन्मजात हृदय दोष और कोरोनरी आर्टरी डिजीज भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, डायबिटीज, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ती उम्र भी कार्डियक अरेस्ट के जोखिम से जुड़े कारक हैं।
कार्डियक अरेस्ट होने पर हर सेकंड अहम
कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में दिल के रक्त पंप करना बंद करने से दिमाग और शरीर के दूसरे हिस्सों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है। ऐसे में मदद मिलने में होने वाली देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, बेहोश हो और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलानी चाहिए। मेडिकल टीम के पहुंचने तक सीपीआर शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
सीपीआर कैसे मदद करता है?
सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन के दौरान व्यक्ति की छाती के बीच वाले हिस्से पर लगातार दबाव दिया जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, वयस्क व्यक्ति में छाती पर प्रति मिनट 100 से 120 बार दबाव दिया जाना चाहिए।
सीपीआर का उद्देश्य दिल के दोबारा सामान्य रूप से काम करने तक शरीर और खासकर दिमाग तक रक्त का प्रवाह बनाए रखने में मदद करना है। हालांकि, सीपीआर खुद दिल को सामान्य धड़कन में वापस लाने की गारंटी नहीं देता, लेकिन समय पर शुरू किया गया सीपीआर जीवित बचने की संभावना बढ़ा सकता है।
AED मशीन भी हो सकती है बेहद अहम
अगर आसपास एईडी यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर उपलब्ध हो, तो उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यह उपकरण हृदय की धड़कन का विश्लेषण करता है और जरूरत होने पर विद्युत झटका देकर सामान्य हृदय लय बहाल करने में मदद कर सकता है।
कार्डियक अरेस्ट में तुरंत मदद बुलाना, सीपीआर शुरू करना और उपलब्ध होने पर एईडी का इस्तेमाल करना बेहद महत्वपूर्ण कदम हैं। ऐसे समय में इलाज शुरू होने में हर मिनट की देरी स्थिति को और गंभीर बना सकती है।