क्या उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में बीजेपी के सबसे मजबूत किले में बड़ी दरार पड़ने वाली है? आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पार्टी के भीतर मची कलह अब खुलकर सड़क पर आ गई है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ‘टाटा-बाय-बाय’ लिखकर सनसनी फैलाने वाले बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने आखिरकार पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस बड़े कदम से राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है।
‘टाटा-बाय-बाय‘ लिखकर छोड़ा साथ
6 अक्टूबर को आंवला से पूर्व बीजेपी सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने सोशल मीडिया पर ‘टाटा-बाय-बाय’ लिखकर और अपने बायो से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाकर पार्टी से नाराजगी के संकेत दिए थे। इसके एक दिन बाद, 7 अक्टूबर को उन्होंने आधिकारिक तौर पर भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया।
पार्टी से इस्तीफे के साथ उन्होंने अपनी नाराजगी की वजह भी बताई। धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में उनके खिलाफ काम करने और भितरघात करने वालों को पार्टी में तरजीह दी गई और बड़े पद दिए गए। उन्होंने ऐसे लोगों पर कार्रवाई नहीं होने पर भी नाराजगी जताई।
भीतरघातियों को पद मिलने से भड़के नेताजी
पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़ने की मुख्य वजह बताते हुए 2024 लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जिन लोगों ने खुलकर उनकी मुखालफत की और उनके खिलाफ भीतरघात किया, पार्टी ने बाद में उन्हीं लोगों को तरजीह देते हुए बड़े पदों पर बैठाया। धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि इससे उन्हें गहरा कष्ट और निराशा हुई है।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि ऐसे अनुशासनहीन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो उनके जैसे निष्ठावान कार्यकर्ता का ‘टाटा-बाय-बाय’ कहना स्वाभाविक है। उनके इस बयान के बाद भाजपा में उनकी नाराजगी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अगले सियासी कदम पर सस्पेंस बरकरार
पार्टी छोड़ने के बाद उनके समाजवादी पार्टी या किसी अन्य दल में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं, लेकिन धर्मेंद्र कश्यप ने अपने अगले राजनीतिक कदम पर फिलहाल सस्पेंस बनाए रखा है। उनका कहना है कि वह जल्द ही अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे और सभी की सहमति के बाद ही अपनी अगली राजनीतिक राह तय करेंगे।
अब राजनीतिक जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कश्यप और निषाद वोटबैंक के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले धर्मेंद्र कश्यप का अगला कदम क्या होगा और यह बीजेपी के लिए कितना नुकसानदायक साबित होगा?