नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की तीन दिवसीय बैठक आज, 5 अक्टूबर से शुरू हो गई है। 7 अक्टूबर को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला सुनाएंगे। इस बार बाजार की नजर रेपो रेट पर टिकी है, क्योंकि महंगाई, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात के बीच रेपो रेट में बढ़ोतरी की उम्मीद मजबूत हो गई है।
25 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है रेपो रेट
मौजूदा समय में RBI का रेपो रेट 5.25 फीसदी है। अर्थशास्त्रियों के एक सर्वे के मुताबिक 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना सबसे ज्यादा है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगा। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी होगी।
Economic Times के सर्वे में शामिल 21 अर्थशास्त्रियों और बैंक अधिकारियों में से 20 ने दर बढ़ने का अनुमान जताया है, जबकि सिर्फ एक ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रहने की संभावना बताई।
आखिर क्यों बढ़ने की आशंका है ब्याज दर?
RBI के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती बढ़ता महंगाई दबाव है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो RBI के 4 फीसदी के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर है। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में बदलाव भी RBI के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं।
ऐसे में केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई को नियंत्रित रखने और आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
रेपो रेट बढ़ा तो EMI पर क्या होगा?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा उधार देता है। जब इसमें बढ़ोतरी होती है तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो सकता है। इसका असर आगे चलकर ग्राहकों के लोन पर पड़ सकता है।
अगर बैंक अपनी ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है। यानी जिन लोगों ने फ्लोटिंग रेट पर कर्ज लिया है, उनके लिए आने वाले समय में मासिक किस्त का बोझ बढ़ने की संभावना रहेगी।
FD वालों के लिए मिल सकती है राहत
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहता। बैंक अपनी डिपॉजिट और FD दरों में भी बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में अगर बैंक जमा पर ब्याज बढ़ाते हैं तो FD और अन्य फिक्स्ड-इनकम निवेश करने वालों को फायदा मिल सकता है।
2025 में लगातार हुई थी दरों में कटौती
RBI ने 2025 में रेपो रेट में कुल 1.25 फीसदी की कटौती की थी और इसे 6.50 फीसदी से घटाकर 5.25 फीसदी किया गया था। इसके बाद 2026 की पिछली बैठकों में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा गया। अगस्त की MPC बैठक में भी समिति ने दर को इसी स्तर पर बनाए रखा था।
अब अक्टूबर की बैठक में संभावित दर बढ़ोतरी इस कटौती चक्र के बाद नीति में बड़े बदलाव का संकेत दे सकती है।
कब आएगा RBI का फैसला?
MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 7 अक्टूबर को मौद्रिक नीति के फैसले का ऐलान करेंगे। तब साफ होगा कि रेपो रेट बढ़ता है, 5.25 फीसदी पर कायम रहता है या बाजार को किसी दूसरी दिशा में संकेत मिलता है।