नई दिल्ली: मगरमच्छ को दुनिया के खतरनाक शिकारियों में गिना जाता है। यह अपने शिकार को पकड़ने के बाद अक्सर बड़े टुकड़ों में ही निगल जाता है। लेकिन इसकी एक आदत बेहद हैरान करने वाली है—मगरमच्छ कई बार भोजन के साथ छोटे-छोटे पत्थर भी निगल लेता है। पहली नजर में यह व्यवहार अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे उसके शरीर की एक खास प्राकृतिक प्रक्रिया काम करती है।
दांतों से ज्यादा पेट में होती है खाने की कुटाई
मगरमच्छ इंसानों की तरह भोजन को अच्छी तरह चबाकर नहीं खाता। वह शिकार के बड़े हिस्से को सीधे निगल सकता है। इस दौरान मांस के साथ हड्डियां और दूसरे कठोर हिस्से भी उसके पेट में पहुंच जाते हैं।
यहीं निगले गए छोटे पत्थर अहम भूमिका निभा सकते हैं। इन्हें गैस्ट्रोलिथ कहा जाता है। भोजन के साथ पेट में मौजूद ये पत्थर उसे मथने और रगड़ने में मदद कर सकते हैं। इस तरह वे पेट के भीतर एक प्राकृतिक ग्राइंडर की तरह काम करते हैं और भोजन को छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करते हैं।
सिर्फ पत्थर नहीं, पेट का तेजाब भी करता है बड़ा काम
भोजन को पचाने की पूरी जिम्मेदारी पत्थरों की नहीं होती। मगरमच्छ के पेट में बेहद अम्लीय वातावरण पाया जाता है, जो मांस, हड्डियों और अन्य कठोर पदार्थों को तोड़ने में मदद करता है।
यानी पेट के अंदर दो प्रक्रियाएं साथ-साथ काम कर सकती हैं। पत्थर भोजन को यांत्रिक रूप से छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करते हैं, जबकि पेट का अम्ल उसे रासायनिक रूप से पचाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।
क्या पानी में संतुलन बनाने के लिए निगलता है पत्थर?
गैस्ट्रोलिथ को लेकर एक और संभावना भी सामने आती है। पेट में मौजूद पत्थरों का वजन मगरमच्छ के शरीर की स्थिति और पानी में उसकी उछाल को प्रभावित कर सकता है। इससे उसे पानी में तैरने या डूबे रहने के दौरान कुछ स्थिरता मिलने की संभावना बताई जाती है।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि मगरमच्छ केवल पानी में गहराई तक जाने के लिए ही पत्थर निगलता है। इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं और पाचन में मदद करना इनमें प्रमुख कारणों में माना जाता है।
मगरमच्छ के लिए पत्थर बना प्राकृतिक ग्राइंडर
इंसानों के लिए मामूली कंकड़ भले ही बेकार हो, लेकिन मगरमच्छ के शरीर में पहुंचकर यही पत्थर उसकी पाचन प्रक्रिया का हिस्सा बन सकता है। शिकार के साथ पत्थरों को निगलने की यह आदत उसके भोजन को संभालने वाली प्राकृतिक व्यवस्था का हिस्सा मानी जाती है।