UPI Transaction: यूपीआई पेमेंट को लेकर व्यापारियों के विरोध के बीच सितंबर के आंकड़ों में लेनदेन में गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त की तुलना में सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन 1.8 फीसदी घटकर 2,407 करोड़ रह गया। हालांकि, रोजाना औसत लेनदेन के आंकड़े कुछ और तस्वीर पेश करते हैं।
सितंबर में 2,407 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन
NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए करीब 2,450 करोड़ लेनदेन हुए थे। सितंबर में यह संख्या घटकर 2,407 करोड़ रह गई। यानी महीने-दर-महीने आधार पर करीब 1.8 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
लेनदेन की कुल वैल्यू में भी गिरावट आई। अगस्त में यूपीआई के जरिए करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन हुए थे, जो सितंबर में घटकर 29.37 लाख करोड़ रुपये रह गए। इस तरह वैल्यू के लिहाज से करीब 1.50 फीसदी की कमी आई।
क्या MDR चार्ज है वजह?
यूपीआई ट्रांजैक्शन में यह गिरावट ऐसे समय दर्ज हुई है, जब 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR चार्ज लागू किए जाने की घोषणा हुई है। यह चार्ज मर्चेंट पर लगाया जाना है, आम यूजर से सीधे वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है।
इसी प्रस्तावित शुल्क के विरोध में 2 अक्टूबर को व्यापारियों की ओर से ‘No UPI Day’ विरोध भी किया गया। कई व्यापारियों ने अपने QR कोड स्कैनर को काले कपड़े से ढककर विरोध जताया।
आम यूजर के लिए अभी भी UPI फ्री
MDR चार्ज को लेकर लोगों के बीच यह आशंका जरूर है कि इसका बोझ दुकानदार किसी न किसी रूप में ग्राहकों पर डाल सकते हैं। इसमें कीमत बढ़ाना या मिलने वाली छूट कम करना जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक आम यूजर के लिए यूपीआई भुगतान पर सीधे कोई MDR चार्ज नहीं लगाया जा रहा है। इसलिए सितंबर में आई गिरावट को सिर्फ प्रस्तावित MDR शुल्क से जोड़ना पूरी तरह सही नहीं होगा।
30 दिन का महीना होने से भी आया फर्क
बाजार जानकारों के मुताबिक अगस्त और सितंबर के आंकड़ों की तुलना करते समय दोनों महीनों में दिनों की संख्या का अंतर भी ध्यान में रखना चाहिए। अगस्त में 31 दिन थे, जबकि सितंबर में 30 दिन।
रोजाना औसत ट्रांजैक्शन देखें तो सितंबर में यूपीआई के जरिए प्रतिदिन करीब 80.2 करोड़ लेनदेन हुए, जबकि अगस्त में यह औसत करीब 79.1 करोड़ था। यानी मासिक कुल संख्या घटने के बावजूद रोजाना औसत लेनदेन में बढ़ोतरी हुई।
आंकड़े क्या बताते हैं?
सितंबर में यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन और उनकी वैल्यू में गिरावट जरूर दर्ज हुई है, लेकिन रोजाना औसत लेनदेन बढ़ने से तस्वीर पूरी तरह अलग नजर आती है। ऐसे में इस गिरावट को केवल MDR चार्ज की वजह से लोगों के यूपीआई से दूर होने का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी।