नई दिल्ली: 25 साल की उम्र में 1 लाख रुपये महीने की कमाई सुनने में काफी अच्छी लग सकती है, लेकिन एक युवा की कहानी ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवक ने रेडिट पर अपनी पूरी मासिक आय और खर्च का हिसाब साझा किया, जिसके मुताबिक 1 लाख रुपये की सैलरी में से महीने के अंत तक उसके पास सिर्फ 20 हजार रुपये बचते हैं। उसकी पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि बड़े शहरों में बढ़ती लागत और जीवनशैली के खर्च किस तरह कमाई का बड़ा हिस्सा खत्म कर रहे हैं।
सैलरी आते ही 56 हजार रुपये का खर्च
25 वर्षीय युवक ने अपनी पोस्ट में बताया कि महीने की शुरुआत के 3-4 दिनों के भीतर ही उसकी सैलरी का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। उसके बजट में कार की 25 हजार रुपये की ईएमआई, घर का 25 हजार रुपये किराया और 6 हजार रुपये का बीमा प्रीमियम शामिल है।
इन तीन मदों पर ही कुल 56 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। इसके बाद खाने-पीने के लिए 10 हजार रुपये, पेट्रोल पर 5 हजार रुपये और दूसरे बिलों पर 3 हजार रुपये खर्च होते हैं। सभी खर्च निकालने के बाद उसके पास महीने के अंत में सिर्फ 20 हजार रुपये बचते हैं।
पिता का 8 लाख रुपये का कर्ज भी चुकाना है
युवक की आर्थिक चिंता यहीं खत्म नहीं होती। उसने बताया कि उसके ऊपर पिता का 8 लाख रुपये का कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी भी है। कम बचत होने के कारण वह इस कर्ज को चुकाने में खुद को असमर्थ पा रहा है।
उसने अपनी पोस्ट में बताया कि वह अपनी जवानी में दिन-रात और यहां तक कि सप्ताहांत में भी काम कर रहा है। इसके बावजूद उसका लक्ष्य सालभर में सिर्फ 2 लाख रुपये बचाने तक सीमित रह गया है।
नौकरी गई तो कार और घर दोनों का डर
युवक ने यह भी बताया कि उसके पास किसी तरह की आपातकालीन बचत नहीं है। ऐसे में अगर उसकी नौकरी चली जाती है तो उसके सामने कार की ईएमआई और किराए के घर का खर्च संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
यही वजह है कि 1 लाख रुपये की मासिक आय होने के बावजूद वह खुद को आर्थिक दबाव में महसूस कर रहा है।
कार की ईएमआई पर सबसे ज्यादा सवाल
वायरल पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने युवक के बजट और वित्तीय योजना पर सवाल उठाए। कुछ यूजर्स ने पूछा कि जब उसकी मासिक आय 1 लाख रुपये है तो उसने 25 हजार रुपये की कार ईएमआई क्यों चुनी, जो उसकी आय का एक बड़ा हिस्सा है।
कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि अगर वह पीजी में रहता और छोटी या पुरानी कार का विकल्प चुनता तो हर महीने काफी रकम बचाई जा सकती थी।
वहीं, कुछ यूजर्स ने दूसरी तस्वीर भी सामने रखी। उनका कहना था कि बड़े शहरों में किराया, परिवहन, भोजन और दूसरे जरूरी खर्च काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे में अच्छी सैलरी के बावजूद बचत करना कई युवाओं के लिए चुनौती बन गया है।